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60 साल में तीसरी बार सड़क पर आई दिल्ली पुलिस: तब कई पुलिसवालों को किया था गिरफ्तार, बैरकों में कर दिया था बंद

Tue, 03 Nov 2026 08:22 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Tue, 03 Nov 2026 08:22 AM IST
सार

दिल्ली पुलिस के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मई 1966 में 7,000 से अधिक पुलिसकर्मियों ने बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, उचित कार्य घंटों और बेहतर वेतन-भत्तों की मांग को लेकर आंदोलन किया था। 

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Delhi police personnel staged a protest outside the headquarters
पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली पुलिसकर्मी अपनी मांगों को लेकर अब तक तीन बार सड़क पर उतर चुके हैं। पहली बार पहली बार मई 1966 में दूसरी बार नवंबर 2019 और अब तीसरी बार नवंबर 2026 में। पहली बार की गई हड़ताल में  सरकार ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने के आदेश दे दिए थे। उस समय दिल्ली में मुख्यमंत्री नहीं था और यहां राष्ट्रपति शासन के तहत केंद्र का सीधा प्रशासन था। कई पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, जबकि अन्य को बैरकों में बंद कर दिया था। 

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दिल्ली पुलिसकर्मियों की यह पहली हड़ताल थी। इसके बाद लंबे समय तक उन्होंने वेतन बढ़ोतरी समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन या हड़ताल नहीं की। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 1966 के बाद पुलिसकर्मी दो बार और सड़कों पर उतरे। हालांकि, दोनों बार प्रदर्शन की वजह पहले आंदोलन से बिल्कुल अलग थी। दोनों ही मौकों पर वकीलों के साथ हुए विवाद और पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट के विरोध में जवानों ने प्रदर्शन किया था।

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दिल्ली पुलिस के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मई 1966 में 7,000 से अधिक पुलिसकर्मियों ने बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, उचित कार्य घंटों और बेहतर वेतन-भत्तों की मांग को लेकर आंदोलन किया था। सरकार ने इस आंदोलन को सख्ती से दबा दिया था। गृह मंत्रालय के निर्देश पर सीआरपीएफ ने दिल्ली पुलिस के जवानों को बैरकों में बंद कर दिया था और कई प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

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2 नवंबर 2026 को तीसरी बार प्रदर्शन
दिल्ली पुलिसकर्मियों का तीसरा बड़ा प्रदर्शन सोमवार, दो नवंबर 2026 को शुरू हुआ। शाहदरा थाने में वकीलों के साथ हुई झड़प के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार का तबादला गैर-सक्रिय इकाइयों में हुआ था। पुलिसकर्मियों का आरोप था कि वकीलों के दबाव में यह कार्रवाई की गई। तबादले के विरोध में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, सोमवार को नए पुलिस मुख्यालय पर एकत्र हो गए। स्थिति को देखते हुए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार सहित सभी विशेष आयुक्तों को आपात बैठक बुलानी पड़ी। अधिकारियों ने आदर्श ऑडिटोरियम में जवानों की शिकायतें सुनीं। पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही, विवाद को सुलझाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार प्रयास किए जाते रहे और रात आठ बजे हड़ताल वापस ले ली गई।

11 घंटे चला था आंदोलन 
पुलिसकर्मियों ने दूसरा बड़ा प्रदर्शन तीस हजारी अदालत विवाद के बाद पांच नवंबर 2019 को किया था। जवानों ने आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस के पुराने मुख्यालय के बाहर धरना दिया था। अदालत परिसर में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद वकीलों पर पुलिसकर्मियों से मारपीट का आरोप लगा था। विरोध में हजारों जवान पुराने पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए थे। 11 घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के आश्वासन पर जवानों ने आंदोलन समाप्त किया था।

कोर्ट ने सभी पुनर्विचार आवेदनों को खारिज कर दिया था
नवंबर 2019 में तीस हजारी कोर्ट विवाद के बाद दिल्ली पुलिस के जवानों द्वारा पुलिस मुख्यालय के बाहर करीब 11 घंटे तक चला ऐतिहासिक प्रदर्शन वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ था। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया था कि दिल्ली पुलिस, उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका दायर करेगी। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पुलिस विभाग को दिए गए आश्वासन के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं। इन याचिकाओं के माध्यम से अदालत से 3 नवंबर 2019 को पारित अपने उस आदेश पर स्पष्टीकरण और संशोधन की मांग की गई थी, जिसमें वकीलों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, 6 नवंबर 2019 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय को झटका देते हुए सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि उसका पिछला आदेश पूरी तरह स्पष्ट था और उसमें बदलाव की जरूरत नहीं थी। 

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