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पीजी दुर्घटना: सत्य निकेतन में आज गिराई जाएगी हादसे में क्षतिग्रस्त इमारत, दिल्ली में खतरनाक भवनों की तलाश
Wed, 09 Sep 2026 01:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 09 Sep 2026 01:46 AM IST
सार
एमसीडी बुधवार को इस खतरनाक घोषित इमारत को गिराने की कार्रवाई करेगी। एमसीडी ने इमारत को खाली करा लिया और इसमें बने पीजी में रह रहे बच्चों का सामान बाहर निकालकर उन्हें सौंप दिया।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
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सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद उसके बगल की क्षतिग्रस्त इमारत को भी अब ध्वस्त किया जाएगा। एमसीडी बुधवार को इस खतरनाक घोषित इमारत को गिराने की कार्रवाई करेगी। एमसीडी ने इमारत को खाली करा लिया और इसमें बने पीजी में रह रहे बच्चों का सामान बाहर निकालकर उन्हें सौंप दिया।
एमसीडी ने हादसे के बाद निरीक्षण में पाया कि साथ वाली इमारत भी पड़ोसी भवन के गिरने से क्षतिग्रस्त हो गई थी। सुरक्षा के लिहाज से इसे खतरनाक घोषित करते हुए एमसीडी ने तीन दिन के भीतर इमारत को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। इसी आदेश के तहत बुधवार को इसे गिराने की तैयारी की जा रही है। एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, ध्वस्तीकरण शुरू करने से पहले इमारत का एक बार फिर बारीकी से निरीक्षण किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इमारत के भीतर किसी पीजी निवासी का सामान तो नहीं रह गया है।
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पीजी भवनों का सर्वे शुरू
सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने के बाद जागी एमसीडी ने मंगलवार से पूरी दिल्ली के पीजी भवनों को खंगालना शुरू कर दिया है। एमसीडी के प्रारंभिक सर्वे में 29 पीजी भवनों में छोटी और छह में बड़ी मरम्मत की जरूरत सामने आई है। छोटी मरम्मत वाले भवनों में करीब 424 लोग और बड़ी मरम्मत वाले छह भवनों में करीब 92 लोग रह रहे हैं। इस तरह सत्य निकेतन हादसे के बाद हुई पहली व्यापक पड़ताल में ही सैकड़ों लोगों की सुरक्षा से जुड़ी मरम्मत की जरूरत सामने आ गई है। इन भवनों पर कार्रवाई कब होगी और वहां रहने वालों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी, यह बड़ा सवाल है।
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सिविल लाइंस जोन में पीजी भवनों की संख्या में सबसे अधिक है। यहां 450 पीजी भवन दर्ज हुए हैं। इनमें 442 सुरक्षित पाए गए, जबकि आठ में छोटी मरम्मत की जरूरत सामने आई। यहां सर्वे अभी जारी है। केशवपुरम जोन में 285 पीजी की पड़ताल हुई और 270 सुरक्षित मिले, जबकि 10 में छोटी और पांच में बड़ी मरम्मत की जरूरत पाई गई। बड़ी मरम्मत वाले भवनों की संख्या के लिहाज से केशवपुरम सबसे आगे है। नरेला में 67 पीजी की जांच में 60 सुरक्षित और चार में छोटी मरम्मत की जरूरत मिली। रोहिणी के 32 पीजी फिलहाल सुरक्षित पाए गए।
पश्चिम जोन में 48 पीजी मिले। इनमें 43 सुरक्षित और पांच में छोटी मरम्मत की जरूरत बताई गई। दक्षिण जोन में 47 पीजी की जांच हुई और 45 सुरक्षित मिले, जबकि एक में छोटी और एक में बड़ी मरम्मत की जरूरत सामने आई। बड़ी मरम्मत वाले भवन में करीब 56 लोग रह रहे हैं। सत्य निकेतन भी इसी जोन का हिस्सा है। शाहदरा दक्षिण के 20 पीजी में 19 सुरक्षित और एक में छोटी मरम्मत की जरूरत मिली। शाहदरा उत्तर में एक पीजी की जांच हुई और वह सुरक्षित पाया गया।
नजफगढ़ के 65 और मध्य जोन के 57 पीजी में फिलहाल किसी तरह की मरम्मत या खतरनाक नहीं पाई गई। शहर-एसपी जोन के दो और केशवपुरम के पांच पीजी भी सुरक्षित मिले। सर्वे की सबसे अहम अधूरी तस्वीर करोल बाग से सामने आई। यहां 44 पीजी भवनों में करीब 1100 लोग रह रहे हैं, लेकिन अंतरिम रिपोर्ट में इन्हें सुरक्षित, मरम्मत योग्य या खतरनाक श्रेणी में अलग-अलग नहीं बताया गया है। यहां सर्वे अभी जारी है।
खतरनाक भवनों पर कार्रवाई के लिए सभी जोनल डीसी को जिम्मा
सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी ने खतरनाक एवं जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने सभी जोनल उपायुक्तों (डीसी) को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण कर असुरक्षित भवनों की पहचान करने और खतरे के स्तर के आधार पर उनका वर्गीकरण करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने खतरा पैदा करने वाले भवनों के खिलाफ कानून के तहत सीलिंग और ध्वस्तीकरण समेत तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।
आयुक्त ने जोनल उपायुक्तों के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि ऐसे भवनों और संरचनाओं की पहचान की जाए, जो मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। चिन्हित भवनों को उनकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इनमें तत्काल जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले भवनों के साथ ऐसे भवन भी शामिल होंगे, जिन्हें छोटी-बड़ी मरम्मत अथवा संरचनात्मक सुधार की जरूरत है। आयुक्त ने ऐसे अनधिकृत और अवैध निर्माण के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जो भवन की संरचनात्मक सुरक्षा से समझौता करते हैं अथवा वहां रहने वाले लोगों और आम जनता के लिए जोखिम पैदा करते हैं।