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Delhi NCR News: डूसू चुनाव में राजनीतिक दलों की भागीदारी का आरोप, नई उम्मीदवारों की सूची की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डीयूएसयू) चुनावों को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। उसमें आरोप लगाया गया है कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बावजूद राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा विजेता ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने छात्र चुनावों को राजनीतिक दलों के प्रभाव से मुक्त रखने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू नहीं किया। याचिकाकर्ता ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2006 के आदेश के अनुरूप चुनाव कराने की मांग की है। विशेष रूप से लिंगदोह समिति की सिफारिशों के खंड 6.3 का हवाला दिया गया है, जिसमें छात्र चुनावों और छात्र प्रतिनिधित्व को राजनीतिक दलों से अलग रखने की बात कही गई है। याचिका में आरोप है कि एनएसयूआई, एबीवीपी, आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एएसएपी तथा एसएफआई-एआईएसए गठबंधन जैसे राजनीतिक छात्र संगठनों ने पैनल जारी किए या उम्मीदवार घोषित किए। यह लिंगदोह समिति की सिफारिशों और डीयूएसयू संविधान के खिलाफ है।
याचिका में 11 सितंबर को मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा जारी नोटिस को भी चुनौती दी गई है, जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इनमें राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं, इसलिए उनकी उम्मीदवारी रद्द की जानी चाहिए।
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डीयूएसयू) चुनावों को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। उसमें आरोप लगाया गया है कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बावजूद राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा विजेता ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने छात्र चुनावों को राजनीतिक दलों के प्रभाव से मुक्त रखने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू नहीं किया। याचिकाकर्ता ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2006 के आदेश के अनुरूप चुनाव कराने की मांग की है। विशेष रूप से लिंगदोह समिति की सिफारिशों के खंड 6.3 का हवाला दिया गया है, जिसमें छात्र चुनावों और छात्र प्रतिनिधित्व को राजनीतिक दलों से अलग रखने की बात कही गई है। याचिका में आरोप है कि एनएसयूआई, एबीवीपी, आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एएसएपी तथा एसएफआई-एआईएसए गठबंधन जैसे राजनीतिक छात्र संगठनों ने पैनल जारी किए या उम्मीदवार घोषित किए। यह लिंगदोह समिति की सिफारिशों और डीयूएसयू संविधान के खिलाफ है।
याचिका में 11 सितंबर को मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा जारी नोटिस को भी चुनौती दी गई है, जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इनमें राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं, इसलिए उनकी उम्मीदवारी रद्द की जानी चाहिए।
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