जीवन बीमा निगम: 'फिलहाल सरकारी हिस्सेदारी बेचने की योजना नहीं', सीईओ आर दुरैस्वामी ने बताया भविष्य का रोडमैप
एलआईसी में फिलहाल सरकार की ओर से हिस्सेदारी बेचने की कोई जल्दबाजी नहीं है। सीईओ आर दुरैस्वामी ने कंपनी की निवेश रणनीति, दावों के आसान भुगतान और 2047 तक 'सभी के लिए बीमा' के लक्ष्य पर खुलकर बात की है। पूरी खबर पढ़ें और जानें क्या है एलआईसी का भविष्य का रोडमैप।
विस्तार
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में निकट भविष्य में सरकार की ओर से अपनी हिस्सेदारी बेचने (ऑफलोडिंग) की कोई योजना नहीं है। एलआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आर दुरैस्वामी ने मुंबई में एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार के पास सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों को पूरा करने के लिए अभी पर्याप्त समय है और आगे की हिस्सेदारी बेचने का फैसला पूरी तरह से सरकार की इच्छा पर निर्भर करेगा। फिलहाल कंपनी का पूरा ध्यान दीर्घकालिक विकास और पॉलिसीधारकों के पैसों की सुरक्षा पर है।
सवाल: क्या निकट भविष्य में सरकार एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी?
सीईओ आर दुरैस्वामी ने बताया कि हमें तत्काल भविष्य में सरकार द्वारा हिस्सेदारी घटाने की कोई उम्मीद नहीं है। सरकार इस संबंध में नियमों के अनुसार ही कदम उठाएगी। गौरतलब है कि मई 2022 में आईपीओ के जरिए सरकार ने एलआईसी में अपनी 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर इसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराया था। वर्तमान में सरकार ही इस बीमा कंपनी की बहुलांश शेयरधारक बनी हुई है।
सवाल: कंपनियों में निवेश और हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर एलआईसी की क्या रणनीति?
शेयर बाजार में निवेश और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े संस्थानों में हिस्सेदारी बढ़ाने के फैसले पर दुरैस्वामी ने कहा कि एलआईसी अपनी निवेश होल्डिंग्स की लगातार समीक्षा करती है। उन्होंने निवेश के लिए निम्नलिखित रणनीति बताई:
- अवसर और कैश-फ्लो: निवेश के फैसले हमेशा बाजार के अवसरों और देनदारियों के प्रबंधन के लिए आवश्यक कैश-फ्लो के आधार पर लिए जाते हैं।
- नियामक दायरा: कंपनी के सभी फैसले तय नियामक नियमों के दायरे में होते हैं, जो यह निर्धारित करते हैं कि एलआईसी किसी कंपनी में कितनी हिस्सेदारी रख सकती है।
- दीर्घकालिक मूल्य: किसी भी संस्थान या कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाने का मूल उद्देश्य शेयरधारकों और पॉलिसीधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य का निर्माण करना है।
सवाल: पॉलिसीधारकों के पैसों की सुरक्षा कैसे तय की जाती है?
वैकल्पिक एसेट क्लास जैसे कि प्राइवेट इक्विटी और क्रेडिट में निवेश पर एलआईसी प्रमुख ने कहा कि ग्राहकों के हितों और पूंजी की सुरक्षा ही हमारे लिए सर्वोपरि है। लंबी अवधि की देनदारियों को देखते हुए पूंजी की सुरक्षा और सुरक्षित रिटर्न प्रदान करना हमारी पहली प्राथमिकता है। सुरक्षित निवेश के जरिए ही हितधारकों के हितों की रक्षा की जा सकती है।
सवाल: पॉलिसीधारकों के लिए क्लेम की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए क्या तैयारी है?
एलआईसी ग्राहकों के लिए कागजी कार्रवाई को कम और क्लेम भुगतान की प्रक्रिया को आसान बना रही है। मैच्योरिटी क्लेम के लिए ऐसी डिजिटल व्यवस्था लाई जा रही है जहां पात्र ग्राहकों को अतिरिक्त औपचारिकताएं नहीं करनी होंगी। कंपनी केवल ग्राहक के सक्रिय जुड़ाव को सत्यापित करेगी और भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
सवाल: 2047 तक सभी के लिए बीमा के लक्ष्य को एलआईसी कैसे हासिल करेगी?
सीईओ ने भारतीय इक्विटी बाजार को लेकर सकारात्मक रुख जताया और कहा कि भारत में बीमा के क्षेत्र में अभी भी बहुत बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। कंपनी ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से देश के कोने-कोने तक पहुंच बनाने के लिए काम कर रही है। अगले तीन से पांच वर्षों में कंपनी तकनीक, टर्म इंश्योरेंस और नए प्लेटिनम प्लान जैसे उत्पादों के दम पर आगे बढ़ेगी। देश में बढ़ती वित्तीय जागरूकता और आर्थिक तरक्की के कारण 2047 तक 'सभी के लिए बीमा' का सरकारी लक्ष्य पूरी तरह से व्यावहारिक और संभव नजर आता है।