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विदेशी बाजारों से अच्छी कमाई कर रहे भारतीय स्मार्ट निवेशक: चार महीने में भेजे 1.40 अरब डॉलर; कितना फायदा?

Sat, 17 Oct 2026 07:35 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 17 Oct 2026 07:35 AM IST
सार

घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय निवेशक अमेरिकी बाजारों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। अमेरिकी शेयरों की तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से निवेशकों को दोहरा फायदा मिला है। लेकिन क्या विदेशी बाजारों में निवेश करना हर निवेशक के लिए फायदेमंद है? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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indian investors send 1.4 billion dollars overseas us stock market investment
वित्त वर्ष 2025-26 में 265.201 करोड़ रुपये भेजे गए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

घरेलू शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक अपने पोर्टफोलियो को विविधता देने (डाइवर्सिफिकेशन) के लिए तेजी से विदेशी बाजारों, विशेषकर अमेरिकी शेयर बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। आरबीआई के नवीनतम लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) डाटा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल से जुलाई 2026) में ही भारतीयों ने इक्विटी और डेट निवेश के लिए 1.40 अरब डॉलर विदेश भेजे हैं। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 में पूरे साल भेजे गए कुल 2.65 अरब डॉलर का लगभग 53 प्रतिशत है।
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 निवेशकों के पोर्टफोलियो में विविधीकरण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2026 में अब तक  निफ्टी 50 में 12% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, अमेरिकी बाजार एसएंडपी 500, 12% चढ़ा है, जबकि टेक-हैवी नैस्डैक-100 इंडेक्स में 18% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है। इस दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 5.7% कमजोर हुआ है। अमेरिकी शेयरों में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को शेयर के भाव बढ़ने के साथ-साथ डॉलर मजबूत होने से रुपये में कनवर्ट करने पर अतिरिक्त रिटर्न (करेंसी गेन) भी मिला है।
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एलआरएस के तहत विदेश भेजे गए फंड का रुझान

अवधि

भेजा गया फंड

तुलना/मुख्य बिंदु

जुलाई 2025

15.619 करोड़ रुपये    

2024 की समान अवधि के बराबर

जुलाई 2026

34.45 करोड़ रुपये

सालाना 121% की बढ़ोतरी

अप्रैल 2026

23.86 करोड़ रुपये

वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत

मई 2026

36.364 करोड़ रुपये

मासिक वृद्धि का सिलसिला जारी

जून 2026

45.669 करोड़ रुपये

इस साल का अब तक का उच्चतम स्तर   


नए निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों ने नए निवेशकों को आगाह किया है कि सिर्फ रुपये की कमजोरी को देखकर विदेशी बाजार में उतरना सही रणनीति नहीं है। रुपया कमजोर होने पर अमेरिकी शेयर खरीदना महंगा हो जाता है। यदि भविष्य में रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है, तो शेयर के भाव बढ़ने के बावजूद रुपये में मिलने वाला अंतिम रिटर्न कम हो सकता है। नए निवेशकों को करेंसी सट्टेबाजी के बजाय पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और वैश्विक टेक व बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल करने के उद्देश्य से ही व्यवस्थित तरीके से विदेश में निवेश करना चाहिए।
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विदेशी बाजारों में निवेश के प्रमुख कारण
वैश्विक अवसरों तक पहुंच: वैश्विक इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन में भारत की हिस्सेदारी केवल करीब 4 प्रतिशत है। यानी 96% निवेश अवसर भारत के बाहर मौजूद हैं।

क्षेत्रीय जोखिमों से बचाव: केवल घरेलू बाजार तक सीमित रहने पर निवेशकों को स्थानीय आर्थिक झटकों, टैरिफ और करेंसी के उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है।

दोहरा लाभ: अमेरिकी शेयर में निवेश से स्टॉक रिटर्न के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन का भी लाभ मिलता है।
 
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