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एक्सप्लेनर: जिस ग्रीन कार्ड को लेकर ट्रंप लाल, उसका क्या काम; क्यों लगातार सख्त हो रहे वीजा से जुड़े नियम?

Sat, 10 Oct 2026 06:25 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता क्या अब और मुश्किल होने वाला है? ट्रंप प्रशासन ने आठ बड़ी टेक कंपनियों पर कार्रवाई की है, जिससे भारतीय पेशेवरों के स्थायी निवास की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पहले भी वीजा नियमों, वेतन और विदेशी छात्रों की जांच को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है। आखिर ग्रीन कार्ड इतना अहम क्यों है और अमेरिका में पढ़ाई व नौकरी करने वालों के लिए आगे क्या बदल सकता है?

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अमेरिकी सरकार का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका में पढ़ाई, नौकरी और स्थायी रूप से बसने की प्रक्रिया विदेशी नागरिकों के लिए मुश्किल होती जा रही है। 8 अक्तूबर 2026 को अमेरिकी सरकार ने आठ टेक कंपनियों को ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित कर दिया। इससे इन कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे पहले भी अमेरिका में नौकरी और पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशियों की जांच और वीजा नियमों में बदलाव किए गए हैं।

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ऐसे में आइए जानते हैं कि अमेरिका में कितने विदेशी पढ़ते और काम करते हैं? नया फैसला क्या है? इससे क्या बदलेगा? अमेरिका में विदेशियों के लिए कितने प्रकार के कार्ड और वीजा हैं? विशेषज्ञों की इस पर क्या राय है?

अमेरिका में कितने विदेशी पढ़ते हैं?

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्थान की ओपन डोर्स 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों में 11,77,766 अंतरराष्ट्रीय छात्र पढ़ रहे थे। इनमें 3,63,019 भारतीय छात्र थे। इसी अवधि में 2,77,118 अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने पहली बार अमेरिकी संस्थानों में दाखिला लिया।

अमेरिका में कितने विदेशी काम करते हैं?

अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका की श्रमशक्ति में विदेशी मूल के 3.23 करोड़ लोग शामिल थे। इनमें करीब 3.09 करोड़ लोग रोजगार में थे। यह आंकड़ा विदेशी मूल के लोगों का है, केवल वर्क वीजा पर काम करने वालों का नहीं।

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा की वित्त वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, एच-1बी वीजा की 3,99,395 याचिकाएं मंजूर हुईं। इनमें 1,41,205 शुरुआती रोजगार से जुड़ी थीं, जबकि 2,58,190 मौजूदा रोजगार जारी रखने या उसमें बदलाव से संबंधित थीं।

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ग्रीन कार्ड क्या है?

ग्रीन कार्ड अमेरिका में कानूनी स्थायी निवासी होने का प्रमाण है। इससे पात्र व्यक्ति को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति मिलती है, लेकिन वह अमेरिकी नागरिक नहीं बन जाता। ग्रीन कार्ड परिवार, नौकरी और कुछ अन्य श्रेणियों के आधार पर मिल सकता है।

नौकरी के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने के कई मामलों में कंपनी को पहले पीईआरएम यानी स्थायी श्रम प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें कंपनी को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला। साथ ही, विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या काम की परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए।

आठ कंपनियों पर क्या कार्रवाई हुई?

8 अक्तूबर 2026 को आठ कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित किया गया। इनमें भारत की टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएलटेक के अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल हैं।
इस कार्रवाई से इन कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, पीईआरएम पर रोक का मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों के सभी कर्मचारियों के एच-1बी वीजा रद्द हो गए हैं। ग्रीन कार्ड और एच-1बी वीजा की प्रक्रिया अलग-अलग है।

अमेरिकी सरकार का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

अमेरिकी सरकार ने क्या आरोप लगाया?

अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने 2009 से अब तक करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए। विभाग के अनुसार, इन कंपनियों को 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूरियां और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले।

विभाग ने कहा कि कंपनियों को निलंबित करने के पीछे कई संघीय जांच चल रही हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती की व्यवस्था का दुरुपयोग किया। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और भर्ती प्रक्रिया की निगरानी बढ़ाना है।

माइक्रोसॉफ्ट पर क्या आरोप लगा और कंपनी ने क्या कहा?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि कंपनी को 6,300 एच-1बी वीजा मंजूरियां और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड मिले।

माइक्रोसॉफ्ट ने जवाब में कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसके दाखिल एच-1बी आवेदनों में करीब 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों के वीजा विस्तार या स्टेटस बदलने से जुड़े थे, न कि नए कर्मचारियों की भर्ती से। कंपनी ने यह भी कहा कि वह एच-1बी कर्मचारियों को समान काम करने वाले दूसरे कर्मचारियों के बराबर वेतन देती है।

अलग से, माइक्रोसॉफ्ट ने जुलाई 2026 में करीब 4,800 पदों में कटौती की घोषणा की थी। यह उसके वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1 प्रतिशत था।

अमेरिका में विदेशियों के लिए कौन-कौन से कार्ड होते हैं?

ग्रीन कार्ड के अलावा अमेरिका में कुछ दूसरे कार्ड भी इस्तेमाल होते हैं। इनका उद्देश्य अलग-अलग है।
  • ग्रीन कार्ड: यह अमेरिका में स्थायी निवासी होने का प्रमाण है। इसकी वैधता आम तौर पर 10 साल होती है, जबकि कुछ सशर्त स्थायी निवासियों को दो साल का कार्ड मिलता है।
  • काम करने की अनुमति वाला कार्ड: इसे रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज यानी ईएडी कहा जाता है। यह पात्र विदेशी नागरिकों को अमेरिका में काम करने की अनुमति का प्रमाण देता है। इससे अपने आप ग्रीन कार्ड नहीं मिलता।
  • सामाजिक सुरक्षा कार्ड: इस पर सामाजिक सुरक्षा संख्या यानी एसएसएन होती है। इसका इस्तेमाल वेतन, कर और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े रिकॉर्ड के लिए किया जाता है। यह कार्ड अपने आप काम करने की अनुमति नहीं देता।
  • सीमा पार यात्रा कार्ड: इसे बॉर्डर क्रॉसिंग कार्ड कहा जाता है। यह पात्र मैक्सिकन नागरिकों को कुछ शर्तों के तहत अमेरिका की सीमित अवधि की यात्रा के लिए जारी किया जाता है। इससे अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति नहीं मिलती।

वीजा - फोटो : Amar Ujala

अमेरिका में किस काम के लिए कौन-सा वीजा मिलता है?

अमेरिकी वीजा को मुख्य रूप से अस्थायी यात्रा और स्थायी निवास से जुड़ी श्रेणियों में बांटा जाता है। वीजा का प्रकार व्यक्ति के अमेरिका जाने के उद्देश्य और उसकी पात्रता पर निर्भर करता है।
  • पढ़ाई के लिए: एफ-1 वीजा अकादमिक पढ़ाई के लिए, एम-1 वीजा व्यावसायिक या गैर-अकादमिक अध्ययन के लिए और जे-1 वीजा एक्सचेंज कार्यक्रमों के लिए होता है।
  • नौकरी के लिए: एच-1बी वीजा विशेषज्ञता वाले पेशों में अस्थायी नौकरी के लिए है। एच-2ए वीजा अस्थायी कृषि कार्यों और एच-2बी वीजा कुछ अस्थायी गैर-कृषि नौकरियों के लिए होता है। एल-1 वीजा के तहत पात्र कर्मचारी अपनी कंपनी के विदेशी कार्यालय से अमेरिकी कार्यालय में स्थानांतरित हो सकते हैं।
  • पर्यटन और व्यावसायिक यात्रा के लिए: बी-1 वीजा अस्थायी व्यावसायिक यात्रा और बी-2 वीजा पर्यटन या कुछ परिस्थितियों में चिकित्सा उपचार के लिए होता है।
  • अन्य विशेष श्रेणियां: ओ वीजा असाधारण क्षमता वाले पात्र लोगों के लिए, पी वीजा कुछ खिलाड़ियों और कलाकारों के लिए, जबकि आई वीजा पात्र विदेशी पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए होता है। ए वीजा राजनयिकों और कुछ सरकारी अधिकारियों के लिए है।
  • स्थायी निवास के लिए: परिवार के पात्र सदस्यों, रोजगार, निवेश और कुछ विशेष श्रेणियों के आधार पर ग्रीन कार्ड से जुड़े वीजा मिल सकते हैं। रोजगार आधारित श्रेणियों में ईबी-1, ईबी-2, ईबी-3, ईबी-4 और ईबी-5 शामिल हैं। इनकी पात्रता और शर्तें अलग-अलग होती हैं।
अस्थायी वीजा पर अमेरिका जाने वाला व्यक्ति अपने आप स्थायी निवासी नहीं बन जाता। उसे ग्रीन कार्ड के लिए संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

एच-1बी वीजा में क्या बदलाव हुए?

  • वेतन आधारित चयन: वित्त वर्ष 2027 की एच-1बी कैप प्रक्रिया के लिए उच्च वेतन स्तर वाले पदों को अधिक प्राथमिकता देने वाला नियम अंतिम किया गया।
  • कंपनियों की जांच: 18 सितंबर 2026 के कार्यकारी आदेश के तहत यह जांच बढ़ाने की बात कही गई कि एच-1बी कर्मचारियों को रखने वाली कंपनियों ने समान पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या ऐसा करने की योजना बनाई है।
  • शुल्क से जुड़े फैसले: नए एच-1बी आवेदनों पर एक लाख डॉलर की फीस की घोषणा और 1,03,265 डॉलर की फीस से जुड़ा अलग प्रस्ताव सामने आया। 

विदेशी छात्रों के लिए क्या बदला?

अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को भी वीजा जांच और काम करने की अनुमति से जुड़े नियमों का पालन करना होता है। दिसंबर 2025 से कुछ छात्र और एक्सचेंज वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया जांच से जुड़े निर्देशों का विस्तार किया गया। मार्च 2026 में कुछ अन्य वीजा श्रेणियों तक ऐसी जांच बढ़ाने की जानकारी भी सामने आई।

पढ़ाई के बाद कुछ पात्र विदेशी विद्यार्थी वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण यानी ओपीटी के तहत अपने अध्ययन क्षेत्र से जुड़े काम का अनुभव ले सकते हैं। सामान्य ओपीटी अवधि 12 महीने तक होती है। पात्र विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित विषयों के विद्यार्थियों को 24 महीने का अतिरिक्त विस्तार मिल सकता है। यह सुविधा पात्रता और संबंधित नियमों पर निर्भर करती है।

अमेरिकी सरकार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

ट्रंप सरकार इतनी सख्ती क्यों कर रही है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों को सख्त करने के पीछे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों, वेतन और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने का तर्क दे रही है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, कुछ कंपनियां H-1B वीजा का इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह उन्हें रखने के लिए कर रही हैं। इसी वजह से सरकार वीजा आवेदनों की जांच बढ़ाने, ज्यादा वेतन और कौशल वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने पर जोर दे रही है।

जीटीआरआई की रिपोर्ट क्या कहती है?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी जीटीआरआई के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत के सॉफ्टवेयर और आईटी-सक्षम सेवाओं के कुल 221.4 अरब डॉलर के निर्यात में 119.7 अरब डॉलर यानी 54.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता था।

भारत के वैश्विक सॉफ्टवेयर और आईटी-सक्षम सेवा निर्यात का 91.7 प्रतिशत हिस्सा देश से ही दिया गया, जबकि 8.3 प्रतिशत सेवाएं विदेशों में ग्राहकों के स्थान पर काम करने वाले पेशेवरों के जरिए दी गईं। इस वैश्विक अनुपात के आधार पर जीटीआरआई ने अनुमान लगाया कि अमेरिकी बाजार में करीब 109.8 अरब डॉलर की सेवाएं भारत से और 9.9 अरब डॉलर की सेवाएं विदेशों में काम करने वाले पेशेवरों के जरिए दी गईं। 
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विशेषज्ञों की क्या राय है?

पूर्व इन्फोसिस मुख्य वित्त अधिकारी टी.वी. मोहनदास पई ने कहा कि इस फैसले का तत्काल असर सीमित हो सकता है, क्योंकि ग्रीन कार्ड के लिए पहले से ही लंबी प्रतीक्षा सूची है। उनके मुताबिक, कुछ आवेदकों को स्थायी निवास पाने में 10 से 15 साल तक लग सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई भविष्य में ग्रीन कार्ड प्रायोजन की प्रक्रिया को प्रभावित करेगी, न कि सभी मौजूदा वीजा को अपने आप रद्द कर देगी।

जोहो के संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेंबू ने अमेरिका में काम कर रहे भारतीय तकनीकी पेशेवरों से भारत लौटकर देश के तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने अमेरिका की तकनीकी प्रगति में बड़ा योगदान दिया है, लेकिन वहां उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।

भारतीय आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम ने कहा कि अमेरिका में भारतीय टेक कंपनियों की एच-1बी वीजा पर निर्भरता पहले ही काफी कम हुई है और अपेक्षाकृत कम कर्मचारी पीईआरएम प्रक्रिया के जरिए ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश करते हैं।

जीटीआरआई ने भारतीय कंपनियों को दूसरे बाजारों में कारोबार बढ़ाने, भारत से सेवाएं देने की क्षमता मजबूत करने, जरूरत के अनुसार अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियां करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी अधिक मूल्य वाली तकनीकी सेवाओं पर ध्यान देने की सलाह दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति में बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने वैश्विक क्षमता केंद्रों का विस्तार भी कर सकती हैं।
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