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एक्सप्लेनर: स्टारलिंक का रिमोट किसके हाथ, एलन मस्क या अमेरिकी सरकार? ईरान से यूक्रेन तक कैसे हुआ इस्तेमाल

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sat, 24 Oct 2026 04:46 PM IST

सार

एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक अब सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सैन्य रणनीति का भी अहम हिस्सा बन गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान से लेकर यूक्रेन तक अलग-अलग मौकों पर इस सेवा की उपलब्धता को लेकर स्पेसएक्स से संपर्क किया। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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रिपोर्ट में बड़ा खुलासा - फोटो : Amar Ujala

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को लेकर आए दिन नए विवाद सामने आ रहे हैं। इस बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने अपने निजी हितों के लिए कई बार कंपनी की इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल दुनिया भर में किया है। 

ऐसे में आइए जानते हैं कि स्टारलिंक को लेकर क्या खुलासा हुआ है? कहां और कब-कब इसका इस्तेमाल किया गया है? इसे लेकर क्या विवाद सामने आया है? भारत में स्टारलिंक को लेकर हालिया विवाद क्या है?

स्टारलिंक की इंटरनेट सेवा क्यों है अलग?

स्पेसएक्स अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की एयरोस्पेस निर्माता और अंतरिक्ष परिवहन कंपनी है। इसकी स्टारलिंक सेवा पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद 11 हजार से ज्यादा सैटेलाइट के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है। इसके लिए खास उपकरणों की जरूरत होती है, जिन्हें स्टारलिंक टर्मिनल कहा जाता है। ये सैटेलाइट से सिग्नल लेकर इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।



स्टारलिंक की मदद से उन इलाकों में भी इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां सामान्य इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध नहीं है या युद्ध के कारण संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इसका इस्तेमाल दूरदराज के घरों, नावों और विमानों में भी होता है। युद्ध के दौरान यही तकनीक सैन्य इकाइयों के बीच संपर्क बनाए रखने और ड्रोन अभियानों में मदद कर सकती है। 

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रिपोर्ट में बड़ा खुलासा - फोटो : Amar Ujala
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को लेकर आए दिन नए विवाद सामने आ रहे हैं। इस बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने अपने निजी हितों के लिए कई बार कंपनी की इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल दुनिया भर में किया है। 

ऐसे में आइए जानते हैं कि स्टारलिंक को लेकर क्या खुलासा हुआ है? कहां और कब-कब इसका इस्तेमाल किया गया है? इसे लेकर क्या विवाद सामने आया है? भारत में स्टारलिंक को लेकर हालिया विवाद क्या है?

स्टारलिंक की इंटरनेट सेवा क्यों है अलग?

स्पेसएक्स अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की एयरोस्पेस निर्माता और अंतरिक्ष परिवहन कंपनी है। इसकी स्टारलिंक सेवा पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद 11 हजार से ज्यादा सैटेलाइट के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है। इसके लिए खास उपकरणों की जरूरत होती है, जिन्हें स्टारलिंक टर्मिनल कहा जाता है। ये सैटेलाइट से सिग्नल लेकर इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।

स्टारलिंक की मदद से उन इलाकों में भी इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां सामान्य इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध नहीं है या युद्ध के कारण संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इसका इस्तेमाल दूरदराज के घरों, नावों और विमानों में भी होता है। युद्ध के दौरान यही तकनीक सैन्य इकाइयों के बीच संपर्क बनाए रखने और ड्रोन अभियानों में मदद कर सकती है। 

किन-किन देशों में स्टारलिंक देती है सेवा?

स्टारलिंक की वेबसाइट पर मौजूद अवेलिबिलिटी मैप में इसकी सर्विस का पूरा लेखा-जोखा मिलता है, जिसे कोई भी देख सकता है। इसके मुताबिक, दुनिया के अधिकांश देशों में स्टारलिंक की सर्विस उपलब्ध है। इसमें नॉर्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, पौलैंड, फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, यूक्रेन, कजाकस्तान, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई देश शामिल हैं। भारत से सटे पड़ोसी देशों जैसे भूटान, श्रीलंका और बांग्लादेश में भी कंपनी अपनी सर्विस दे रही है।

दक्षिण पूर्व एशिया की बात करें तो वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिय और फिलिपींस में भी स्टारलिंक की सेवाएं उपलब्ध हैं। अफ्रीका में सेनेगल, चाड, केन्या, सोमालिया और जिम्बॉबवे में भी स्टारलिंक उपलब्ध है। खाड़ी देशों की बात करें तो ओमान, इराक और यमन में भी स्टारलिंक सर्विस दे रही है। वहीं, दर्जनों देश ऐसे भी हैं जहां स्टारलिंक को 'पेंडिंग रेगुलेटरी अप्रूवल' यानी सरकारी मंजूरी के इंतजार वाली श्रेणी में रखा गया है। इनमें भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किए और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं। वहीं स्टारलिंक पर चीन, रूस, ईरान और अफगानिस्तान में पूरी तरह पाबंदी है।

स्टाशील्ड - फोटो : अमर उजाला

क्या खुलासा हुआ?

रॉयटर्स ने छह पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप, दोनों के प्रशासन ने अलग-अलग मौकों पर स्पेसएक्स से स्टारलिंक की सेवा को लेकर अनुरोध किए। कुछ मामलों में अमेरिकी सरकार चाहती थी कि लोगों को इंटरनेट उपलब्ध कराया जाएं, जबकि दूसरे मामलों में उसका उद्देश्य कुछ सशस्त्र समूहों को इस सेवा का इस्तेमाल करने से रोकना था।

इन अनुरोधों की वजह हर देश में अलग थी। यमन और लेबनान में अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ समूहों की स्टारलिंक तक पहुंच को लेकर चिंता जताई, जबकि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट उपलब्ध कराने की कोशिश की गई। यूक्रेन में यह सेवा सैन्य संचार का अहम हिस्सा बनी और बाद में इसकी उपलब्धता को लेकर विवाद भी हुआ।

यमन-लेबनान में स्टारलिंक का इस्तेमाल - फोटो : अमर उजाला

कहां-कहां और किस मकसद से इस्तेमाल हुआ स्टारलिंक?

यमन और लेबनान: सशस्त्र समूहों की पहुंच रोकने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, बाइडन प्रशासन को खुफिया जानकारी मिली थी कि यमन में हूती और लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े लोग बिचौलियों के जरिए स्टारलिंक के उपकरण हासिल कर सकते हैं। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने स्पेसएक्स से ऐसे उपकरणों की पहचान करने और उनकी सेवा बंद करने का अनुरोध किया।

अक्तूबर 2023 में दक्षिणी लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई के दौरान अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने व्हाइट हाउस को बताया था कि हिजबुल्लाह से जुड़े कुछ लोगों तक स्टारलिंक के उपकरण पहुंच सकते हैं। इसी तरह, 2024 में हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हवाई अभियान के दौरान भी ऐसे संदेह सामने आए। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे कुछ टर्मिनल निष्क्रिय किए भी गए थे। 

ईरान में स्टारलिंक का इस्तेमाल - फोटो : अमर उजाला

ईरान के विरोध प्रदर्श में बाइडन और ट्रंप ने कैसे किया स्टारलिंक का इस्तेमाल?

ईरान में सितंबर 2022 में महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। अमीनी को हिजाब ठीक से नहीं पहनने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन प्रदर्शनों के दौरान बाइडन प्रशासन ने स्पेसएक्स से ईरान में स्टारलिंक सेवा चालू करने का अनुरोध किया, ताकि लोगों को इंटरनेट मिल सके।

एक पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन की मदद से स्टारलिंक के उपकरण ईरान पहुंचाए गए थे। हालांकि, कितने उपकरण भेजे गए, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

ईरान में स्टारलिंक को लेकर अमेरिकी सरकार की दिलचस्पी बाद के वर्षों में भी बनी रही। जून 2025 और फरवरी 2026 में अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमलों के बाद ट्रंप प्रशासन ने स्पेसएक्स के साथ वहां स्टारलिंक के उपकरण पहुंचाने और उन्हें सक्रिय करने पर चर्चा की।

एक पूर्व वरिष्ठ ट्रंप प्रशासन अधिकारी और मामले से परिचित एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि इसका उद्देश्य सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को इंटरनेट और संचार सुविधा उपलब्ध कराना था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन और स्पेसएक्स ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की कि ईरान में ये उपकरण सक्रिय किए गए थे। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने फरवरी 2026 में रिपोर्ट किया था कि अमेरिकी सरकार ने ईरान में हजारों स्टारलिंक टर्मिनल भेजे थे। 

स्टारलिंक का इस्तेमाल - फोटो : अमर उजाला

यूक्रेन में कैसे दिखा दोहरा रवैया?

रूस के 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद स्टारलिंक यूक्रेनी सेना के लिए संचार का अहम जरिया बन गया। बाइडन प्रशासन ने स्पेसएक्स से यूक्रेनी सेना के लिए इस सेवा का विस्तार करने को कहा था।

यूक्रेन की सेना स्टारलिंक का इस्तेमाल सैन्य इकाइयों के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए करती है। इसके सैन्य संस्करण स्टारशील्ड का इस्तेमाल ड्रोन को रास्ता दिखाने और दूर बैठे ऑपरेटर से उनका संपर्क बनाए रखने में भी किया जाता है। इसके रिसीवर रेडियो सिग्नल बाधित करने की कोशिशों का सामना कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे ड्रोन रूस के नियंत्रण वाले इलाकों के पीछे तक अभियान चलाने में इस्तेमाल किए जाते हैं।

यूक्रेन की सेना की इस सेवा पर निर्भरता के बीच स्टारशील्ड तक पहुंच और स्टारलिंक की गति को लेकर विवाद सामने आया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पिछले हफ्ते कहा कि स्टारशील्ड तक यूक्रेन की पहुंच जानबूझकर सीमित की गई, जिससे उसके सैन्य ड्रोन के प्रदर्शन पर असर पड़ा। 

रॉयटर्स का दावा है कि स्टारशील्ड की गति सीमित करने का आदेश व्हाइट हाउस के भीतर से आया था। ट्रंप प्रशासन ने सेवा की गति कम होने की बात स्वीकार की, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि आदेश उन्होंने दिया था या नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने इस मुद्दे पर मस्क से बात नहीं की है, लेकिन अगर कोई समस्या है तो वह उसे ठीक कराएंगे।

वॉशिंगटन स्थित यूक्रेनी दूतावास की प्रवक्ता हैलिना युसिप्युक ने कहा कि यूक्रेन की प्राथमिकता सेवा की सामान्य गति बहाल कराना है, क्योंकि लोगों की जान इस पर निर्भर करती है। 

एलन मस्क की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?

अलग-अलग देशों में स्टारलिंक की उपलब्धता को लेकर हुए फैसलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि किसी निजी कंपनी का सैन्य अभियानों और विदेश नीति पर कितना प्रभाव होना चाहिए। अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद जेसन क्रो ने कहा कि निर्वाचित न हुए अरबपतियों और निजी कंपनियों को यह तय नहीं करना चाहिए कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्या बेहतर है।

मस्क की भूमिका को लेकर सवाल पहले भी उठ चुके हैं। रॉयटर्स की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में मस्क ने उन इलाकों में स्टारलिंक कवरेज बंद करने का आदेश दिया था, जहां यूक्रेन रूसी सेना से क्षेत्र वापस लेने की कोशिश कर रहा था। इससे व्हाइट हाउस के अधिकारी हैरान रह गए थे।

मस्क ने यह भी कहा था कि उन्होंने यूक्रेन के उस अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया था, जिसमें क्रीमिया के सेवास्तोपोल बंदरगाह में स्टारलिंक नेटवर्क सक्रिय करने की बात थी। यूक्रेन वहां रूसी बेड़े पर हमला करना चाहता था। मस्क के मुताबिक, उन्हें आशंका थी कि ऐसा करने से वह युद्ध की बड़ी कार्रवाई में शामिल हो जाएंगे।

समिट रिज ग्रुप के अध्यक्ष और सैटेलाइट उद्योग के सलाहकार आर्मंड मुसे ने रॉयटर्स से कहा कि मस्क एक कारोबारी हैं, जिनकी कंपनी को अमेरिकी सरकार से ठेके मिलते हैं, लेकिन वह विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। मुसे ने यह सवाल भी उठाया कि मस्क के फैसले उनकी निजी पसंद से प्रभावित होते हैं या उनके पीछे कोई दूसरा प्रभाव काम करता है।

अमेरिकी सरकार और स्पेसएक्स के बीच कैसा समन्वय रहा?

मस्क ने अपने सोशल मीडिया पर कहा था कि स्टारशील्ड सिस्टम अमेरिकी सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण में हैं। उनके मुताबिक, इनकी उपलब्धता पर सीमा तय करने का फैसला अमेरिकी सेना और अंत में राष्ट्रपति का होता है।

रॉयटर्स के मुताबिक, बाइडन प्रशासन के अधिकारी स्टारलिंक की उपलब्धता से जुड़े मामलों में स्पेसएक्स के साथ समन्वय करते थे। इन चर्चाओं में आमतौर पर पेंटागन और व्हाइट हाउस के अधिकारी भी शामिल होते थे। स्पेसएक्स ने 2024 में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी को दिए जवाब में कहा था कि वह निर्यात मंजूरियां हासिल करने और तकनीक की सुरक्षा के लिए अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है। कंपनी ने इसे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के उद्देश्यों से जुड़ा बताया था। 

स्टारलिंक को लेकर भारत में क्या विवाद हुआ था?

एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर भारत के कुछ बड़े उद्योगपतियों पर इशारा करते हुए आरोप लगाया था कि वे अपनी मोनोपोली बनाए रखने के लिए भारत में स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे हैं।

इस आरोप को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया था। साथ ही दूरसंचार विभाग ने स्पष्ट किया कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के नियम किसी एक कंपनी को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं। स्टारलिंक, जियो सैटेलाइट और वनवेब जैसी कंपनियों को लागू नियमों और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। इन सुरक्षा जांच के बाद ही किसी कंपनी को भारत में काम करने की अनुमति मिलेगी।
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