बाराबंकी.: सरयू नदी के तेज कटान ने हेतमापुर गांव में तबाही मचा रखी है। लगातार हो रहे कटान से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। दूरभाष केंद्र, हनुमान मंदिर और चार मकान नदी में समा चुके हैं। अब गांव में स्थित बाबा नारायण दास की समाधि पर भी कटान का खतरा मंडराने लगा है। गांव के लोग अपने घरों को खाली कर सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। कई परिवार तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। सरयू की धार लगातार हेतमापुर की ओर बढ़ रही है। कटान की चपेट में आकर मैकू लाल, पलटा, साबिर मनिहार और राजू चौहान के मकान नदी में समा चुके हैं। इसके बाद अन्य ग्रामीणों में भी अपने घरों को लेकर भय बढ़ गया है। रामू गुप्ता, श्यामू, सूरज लोधे, मोहम्मद सफीक और शाहिद हुसैन समेत कई ग्रामीण अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कब किसका मकान नदी की धारा में समा जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। ग्रामीण खातून ने बताया कि कटान से पूरा गांव सहमा हुआ है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिली है। उनका आरोप है कि राहत के तौर पर खाना तो मिला, लेकिन उसमें भी भेदभाव किया जा रहा है। खातून के अनुसार उनके परिवार में 10 लोग हैं, जबकि उन्हें केवल चार खाने के पैकेट दिए गए। ऐसे में परिवार के सभी सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि घर खाली करने के बाद सामान रखने और परिवार के साथ रहने के लिए अभी तक प्रशासन की ओर से कोई जमीन चिन्हित नहीं की गई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल सुरक्षित स्थान चिन्हित कर प्रभावित परिवारों को वहां बसाने की व्यवस्था करे। साथ ही कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम किए जाएं, ताकि गांव के बचे हुए मकानों और धार्मिक स्थलों को नदी की धारा में समाने से बचाया जा सके। नदी के उसे पर चार मजरे बसे हैं उसमें पूरनपुर गांव में अमृतलाल ने घर खाली करना शुरू कर दिया है हालांकि वहां तक अभी प्रशासन का कोई भी अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा है , ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान इसी गति से जारी रहा तो हेतमापुर गांव का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त होने का खतरा है। ग्रामीण प्रशासन से राहत सामग्री, सुरक्षित ठिकाने और कटान रोकने के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।