मोगा के सरकारी अस्पताल में पुलिस और डॉक्टर के बीच विवाद होने का मामला सामने आया है। मामला एक लाश को मोर्चरी में रखने को लेकर उस समय गरमा गया, जब इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने मोर्चरी के फ्रिज में जगह न होने का हवाला देते हुए लाश को फरीदकोट या मोगा के गांव सिंघावाला ले जाने के लिए लिखकर दिया। इस दौरान मोगा के थाना सिटी-1 से आए पुलिस कर्मचारियों के साथ डॉक्टर की बहस हो गई। डॉक्टर की ओर से पुलिस कर्मचारियों पर बदसलूकी और धक्का-मुक्की करने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले से संबंधित पुलिस कर्मचारी और डॉक्टर की बहस का वीडियो भी सामने आया है। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर एकम ने बताया कि थाना सिटी-1 से दो पुलिस कर्मचारी लाश लेकर आए थे। उन्हें लाश फरीदकोट या मोगा के गांव सिंघावाला ले जाने के लिए कहा गया और इस संबंध में लिखकर भी दिया गया। लेकिन पुलिस कर्मचारी नहीं माने और बहस करने लगे। डॉक्टर के मुताबिक जब मोर्चरी खोलकर उन्हें दिखाई गई तो पुलिस कर्मचारियों ने कथित तौर पर जबरदस्ती लाश को मोर्चरी के फ्रिज में रख दिया। उन्हें बार-बार बताया गया कि फ्रिज खराब है और इस पर लिखकर भी लगाया गया है। इसके बावजूद लाश वहां रख दी गई। डॉक्टर ने अपने और अपने स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की के आरोप भी लगाए और कहा कि मामला सीनियर एसएमओ के ध्यान में लाया गया है और पुलिस को लिखित शिकायत भी दी गई है। वहीं एसएमओ डॉ. गुरविंदर सिंह ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात थे और उनके साथ सिटी-1 के पुलिस कर्मचारियों द्वारा बदसलूकी की गई है। उनके द्वारा कुछ पुलिस अधिकारियों को मामले के संबंध में सूचित कर दिया गया है। एसएमओ ने बताया कि मोर्चरी में 8 लाशें रखने की क्षमता है, लेकिन एक फ्रिज खराब होने के कारण अब सिर्फ 4 लाशें ही रखी जा सकती हैं और यह जगह पहले से ही भरी हुई थी।