12 जून से 17 जून 2025 की शाम तक, देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी एअर इंडिया को 83 इंटरनेशनल उड़ानों को रद्द करना पड़ा। ये कोई सामान्य रद्दीकरण नहीं था, बल्कि एक के बाद एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का ठप हो जाना यात्रियों के लिए किसी सदमे से कम नहीं रहा। सबसे अधिक प्रभावित वे यात्री रहे, जिन्होंने बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में अपनी लंबी दूरी की यात्रा की योजना बना रखी थी।
सवाल यह है कि छह दिन के भीतर ऐसा क्या हुआ कि 83 उड़ानों को एक झटके में कैंसल करना पड़ा? और इससे भी बड़ा सवाल—क्या एयर इंडिया का ‘ड्रीमलाइनर’ अब डर का पर्याय बनता जा रहा है?
डीजीसीए की जांच से उड़ी नींद, बोइंग 787 की सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द
भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि 12 जून से 17 जून के बीच रद्द की गई 83 वाइड-बॉडी उड़ानों में 66 उड़ानें अकेले बोइंग 787 विमानों की थीं। बोइंग 787, जिसे ‘ड्रीमलाइनर’ कहा जाता है, एअर इंडिया के बेड़े में एक प्रमुख विमान है जो विशेष रूप से यूरोप, अमेरिका और पश्चिम एशिया की उड़ानों में इस्तेमाल होता है।
इनमें रद्द की गई कुछ प्रमुख उड़ानें थीं:
• AI915 – दिल्ली से दुबई
• AI153 – दिल्ली से विएना
• AI143 – दिल्ली से पेरिस
• AI159 – अहमदाबाद से लंदन
• AI170 – लंदन से अमृतसर
• AI133 – बंगलूरू से लंदन
• AI179 – मुंबई से सैन फ्रांसिस्को (बोइंग 777)
इन रद्दीकरणों के पीछे सबसे बड़ा कारण बना हाल ही में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुआ बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर का हादसा, जिसमें विमान टेकऑफ से ठीक पहले तकनीकी गड़बड़ी के कारण रनवे से उतर गया था।
इस दुर्घटना में कई यात्री घायल हुए, कुछ की हालत गंभीर बनी रही और विमान को भारी नुकसान पहुंचा।
इस घटना ने यात्रियों और एविएशन सिस्टम—दोनों को झकझोर दिया।
DGCA ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एयर इंडिया के सभी बोइंग 787 विमानों की ‘सघन निगरानी’ और ‘तकनीकी ऑडिट’ शुरू किया।
डीजीसीए ने अपनी जांच के बाद मंगलवार को कहा कि
“बोइंग 787 विमानों की समीक्षा में कोई गंभीर सुरक्षा खतरा सामने नहीं आया है। रखरखाव और उड़ान प्रणालियां मौजूदा मानकों के अनुरूप पाई गई हैं। लेकिन फिलहाल अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।”
इस वक्त एअर इंडिया के पास कुल 33 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हैं, जिनमें 787-8 और 787-9 दोनों मॉडल शामिल हैं। ये विमान कंपनी की रीढ़ माने जाते हैं और खासकर यूरोपीय देशों, अमेरिका, मध्य-पूर्व और सुदूर पूर्व के रूट्स पर तैनात रहते हैं।
तकनीकी निगरानी के साथ-साथ एक और बड़ा कारण सामने आया है—ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा बढ़ता तनाव, जिसके चलते ईरानी हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया गया है।
इस क्षेत्र के बंद होने से कई लंबी दूरी की फ्लाइट्स को वैकल्पिक और लंबा रूट लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और समय दोनों बढ़ गए हैं।
DGCA ने एयरलाइंस को सलाह दी है कि वे वैकल्पिक उड़ान मार्ग अपनाएं और रूट ऑप्टिमाइजेशन करें, ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समन्वय से उड़ानों को सामान्य करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
रद्द उड़ानों से प्रभावित यात्रियों ने सोशल मीडिया और एयरपोर्ट पर नाराजगी जताई।
क्या संकट और बढ़ेगा? आगे की राह क्या है?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में भी उड़ानों का यह संकट बना रहेगा?
DGCA ने कहा है कि जांच पूरी होने तक एयर इंडिया को नियमित अपडेट देने होंगे और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ईरानी हवाई क्षेत्र जल्दी नहीं खुला और DGCA की जांच लंबी खिंचती है, तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में व्यवधान आगे भी जारी रह सकता है।
हालांकि DGCA की जांच में कोई गंभीर खतरा सामने नहीं आया है, लेकिन यात्रियों का भरोसा डगमगाया है।
बोइंग 787 जैसे विमान, जो कभी ड्रीमलाइनर कहलाए जाते थे, अब कई यात्रियों के लिए नाइटमेयर बनते दिख रहे हैं।
एअर इंडिया के लिए यह समय जवाबदेही, पारदर्शिता और संचार का है। यात्रियों को सिर्फ उड़ान नहीं, सुरक्षा और भरोसे की गारंटी भी चाहिए।
और जब तक यह भरोसा दोबारा नहीं बनता, तब तक हर रद्द फ्लाइट सिर्फ एक टेक्निकल एंट्री नहीं, बल्कि एक अधूरी यात्रा और टूटा हुआ विश्वास होगा।