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West Bengal election 2026: SIR के मुद्दे पर अधीर रंजन ने ममता- अभिषेक को घेरा, बंगाल में सियासी पारा हाई!

Tue, 07 Apr 2026 02:00 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

कांग्रेस नेता Adhir Ranjan Chowdhury ने SIR (विशेष जांच या संदर्भित मुद्दा) को लेकर विपक्षी राजनीति में उभरे मतभेदों पर बयान देते हुए कहा कि इस मुद्दे को सबसे पहले गंभीरता से Rahul Gandhi ने उठाया था। उनके अनुसार राहुल गांधी ने न केवल इस विषय पर सवाल खड़े किए, बल्कि सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को आमंत्रित कर एक बैठक भी आयोजित की, जिसमें SIR की कथित खामियों और उसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। चौधरी ने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना नहीं था, बल्कि एकजुट होकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना था।

उन्होंने आगे कहा कि इस महत्वपूर्ण बैठक में Abhishek Banerjee भी मौजूद थे, जो All India Trinamool Congress (TMC) के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। उस समय ऐसा लगा था कि पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकमत होकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाएगा, लेकिन बाद की घटनाओं ने अलग तस्वीर पेश की। अधीर रंजन चौधरी के अनुसार, बैठक के बाद TMC ने इस मुद्दे पर धीरे-धीरे चुप्पी साध ली, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल खड़े होने लगे।

चौधरी ने TMC के इस रुख पर अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना करते हुए संकेत दिया कि कुछ विपक्षी दल अपने राजनीतिक हितों के अनुसार मुद्दों पर सक्रियता दिखाते हैं और बाद में पीछे हट जाते हैं। उनका मानना है कि यदि सभी विपक्षी दल एकजुट रहते, तो SIR के मुद्दे को अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता था और सरकार पर दबाव बनाया जा सकता था।

इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय राजनीति में विपक्षी एकता अक्सर परिस्थितियों और क्षेत्रीय हितों के कारण प्रभावित होती रहती है। जहां एक ओर राहुल गांधी जैसे नेता राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दों को उठाने की कोशिश करते हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय दल अपने-अपने राजनीतिक समीकरणों के आधार पर निर्णय लेते हैं। अधीर रंजन चौधरी का यह बयान न केवल SIR मुद्दे पर विपक्ष की रणनीति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि विभिन्न दलों के बीच तालमेल की कमी किस तरह बड़े राजनीतिक मुद्दों को कमजोर कर सकती है।

 

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