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विमान हादसे के बाद से नहीं मिल रहा ये फिल्ममेकर!

Mon, 16 Jun 2025 01:26 PM IST
आदर्श वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरती है। महज 4 मिनट बाद, मेघाणी नगर के पास एक मेडिकल कॉलेज की इमारत में भयंकर विस्फोट के साथ गिरकर जल जाती है। विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौके पर मौत हो जाती है। सिर्फ एक यात्री, विश्वास कुमार रमेश, किसी चमत्कार से बच पाते हैं। पर गिनती यहीं नहीं रुकती…

अब एक और नाम जांच के दायरे में आ गया है—महेश कलावड़िया उर्फ महेश जीरावाला, एक फिल्ममेकर, जिनकी आखिरी मोबाइल लोकेशन प्लेन क्रैश साइट से सिर्फ 700 मीटर दूर मिली है। लेकिन वो विमान में थे नहीं। फिर वो वहां क्यों थे? और अब कहां हैं?

नरोदा निवासी 42 वर्षीय महेश कलावड़िया पिछले कुछ वर्षों से गुजराती फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स में सक्रिय थे। गुरुवार को दोपहर 1:14 बजे उन्होंने अपनी पत्नी हेतल से आखिरी बार बात की। उन्होंने कहा—“मैं बस थोड़ी देर में घर आ रहा हूं।”

इसके बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। वो घर नहीं पहुंचे। पहले परिवार ने सोचा शायद कहीं ट्रैफिक में फंस गए होंगे, लेकिन शाम होते-होते जब कोई खबर नहीं मिली, तो पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।

जब पुलिस ने मोबाइल की आखिरी लोकेशन ट्रैक की, तो वो लोकेशन विमान हादसे की जगह के बेहद करीब, महज 700 मीटर दूरी पर मिली। वहीं महेश का स्कूटर भी लापता है।

महेश की पत्नी हेतल कलावड़िया की आवाज में डर साफ झलकता है। उन्होंने कहा:

“वो उस रूट से कभी घर नहीं आते थे। जिस जगह उनकी लोकेशन मिली, वो मेडिकल कॉलेज वाली लेन तो उनके रूट में ही नहीं थी। अब जब इतने लोग मारे गए हैं और शवों की पहचान मुश्किल हो रही है, तो हमें डर है कि कहीं वो भी तो उस हादसे का शिकार नहीं हो गए?”

हेटल ने बताया कि महेश अक्सर शूटिंग या मीटिंग्स के सिलसिले में शहर के अलग-अलग इलाकों में जाते रहते थे, लेकिन उस दिन वह न किसी शूट पर थे और न किसी अपॉइंटमेंट पर।

जिस तरीके से शव हादसे में जल चुके हैं, उनकी शिनाख्त बेहद कठिन है। अब तक 47 शवों की पहचान डीएनए जांच से की गई है। महेश के परिजनों ने भी डीएनए सैंपल जमा कराया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “महेश का कोई रिकॉर्ड विमान यात्रियों की सूची में नहीं है, लेकिन घटनास्थल से इतनी नजदीक आखिरी लोकेशन मिलना संयोग नहीं हो सकता।”

यह सबसे बड़ा सवाल है। जांचकर्ताओं के अनुसार, हो सकता है कि महेश किसी से मिलने आए हों, या संयोग से गलत रास्ते पर मुड़ गए हों। लेकिन उनके फोन और स्कूटर का कोई सुराग न मिलना एक गंभीर संकेत देता है।

स्थानीय लोगों ने भी बताया कि हादसे के वक्त ज़मीन पर भगदड़ मची थी। कई लोग आसपास मदद के लिए दौड़ पड़े थे। शायद महेश भी उनमें से एक थे? या फिर… कोई और कहानी छिपी है?

जोन-3 के एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, “हम हर ऐंगल से जांच कर रहे हैं। मोबाइल ट्रैकिंग से जो जानकारी मिली है, वो महत्वपूर्ण है। अगर महेश जी हादसे के पास मौजूद थे, तो यह पता लगाना जरूरी है कि वह कैसे वहां पहुंचे और फिर क्या हुआ।”

पुलिस ने मेडिकल कॉलेज के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगालना शुरू कर दिया है। हालांकि, हादसे के बाद की अफरा-तफरी में बहुत सारे कैमरे धुएं और मलबे की वजह से कुछ खास रिकॉर्ड नहीं कर पाए।

एक और गंभीर सवाल अब उठने लगा है—क्या महेश जीरावाला इस भयावह हादसे के 242वें पीड़ित हैं?

अगर डीएनए मैच होता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह विमान में सवार तो नहीं थे, लेकिन आग और विस्फोट की चपेट में आकर उनकी भी मौत हो गई। अगर डीएनए नहीं मिला, तो यह लापता व्यक्ति की तलाश का केस बन जाएगा—जिसमें और भी रहस्य खुल सकते हैं।

241 मौतें दर्ज हैं। एक जीवित बचा है। लेकिन अब जब महेश जीरावाला का नाम सामने आया है, और कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, तो सवाल ज़रूरी हैं।

क्या यह हादसा सिर्फ तकनीकी खराबी का मामला है?
क्या कहीं और भी जानें गईं, जो गिनी नहीं गईं?
या फिर… कोई जानबूझकर वहां था?

इन सवालों के जवाब वक्त देगा। और शायद डीएनए टेस्ट भी। लेकिन जब तक वह रिपोर्ट नहीं आती, अहमदाबाद का यह हादसा सिर्फ एक त्रासदी नहीं, बल्कि एक रहस्य भी बना रहेगा।

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