इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की ओर कदम बढ़ा रहे शुभांशु शुक्ला ने आसमान से एक और मैसेज भेजा है. अंतरिक्ष की ऐतिहासिक यात्रा के 24 घंटे बाद शुभांशु शुक्ला ने अपने नए संदेश में कहा कि वह अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ वहां बहुत खुश और रोमांचित हैं. वह सफर के दौरान अंतरिक्ष के नजारों का आनंद ले रहे हैं. दरअसल, शुभांशु तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ड्रैगन के कैप्सूल में सवार हैं, जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की ओर जा रहा है.
अंतरिक्ष से अपने पहले कॉल में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बुधवार के प्रक्षेपण के अनुभव को याद किया। उस पल को ताजा करते हुए इस अनुभव को अवर्णनीय बताया। अंतरिक्ष से 'नमस्कार' के साथ अभिवादन करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि उन्हें शून्य गुरुत्वाकर्षण की आदत हो रही है। उन्होंने कहा, 'मैं अभी भी शून्य गुरुत्वाकर्षण की आदत डाल रहा हूं, जैसे कोई बच्चा चलना सीख रहा हो, यह पता लगा रहा हो कि कैसे आगे बढ़ना है और खुद को संभालना कैसे है। मैं वास्तव में हर पल का आनंद ले रहा हूं। शुभांशु शुक्ला ने पृथ्वी की कक्षा में अपने अनुभव को अवास्तविक और मजेदार बताया।
आप को बता दें कि शुभांशु को 2019 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक के रूप में चुना। उन्होंने रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में 2019-2021 के बीच कठिन प्रशिक्षण लिया।
शुभांशु शुक्ला ने लखनऊ के अलीगंज स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से पढ़ाई की और वर्ष 2001 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद साल 2003 में उन्हें एनडीए (नेशनल डिफेंस एकेडमी) में चयनित किया गया। ट्रेनिंग के दौरान ही उन्होंने विमानन क्षेत्र में विशेष दक्षता हासिल की और भारतीय वायुसेना में शामिल हो गए।
17 जून 2006 को शुभांशु भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट उड़ाने वाले दल का हिस्सा बने। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी मेहनत और कौशल के बल पर वह लगातार आगे बढ़ते गए और साल 2019 में उन्हें विंग कमांडर की रैंक प्राप्त हुई।