शुक्रवार को मदुरै जाने वाली इंडिगो एयरलाइंस की एक फ्लाइट में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे हवा में ही वापस चेन्नई एयरपोर्ट लौटना पड़ा। उड़ान भरने के करीब आधे घंटे बाद पायलट ने खराबी महसूस की और एटीसी से तत्काल लौटने की अनुमति मांगी। विमान में 68 यात्री सवार थे और सभी को सुरक्षित उतार लिया गया।
यह घटना भले ही बड़ी दुर्घटना में नहीं बदली, लेकिन इससे एक सवाल जरूर खड़ा हो गया — आखिर एक के बाद एक फ्लाइट्स में आ रही तकनीकी गड़बड़ियों का कारण क्या है?
इस घटना से दो दिन पहले ही 19 जून को दिल्ली से रायपुर जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-6313 में यात्री लगभग 40 मिनट तक विमान के अंदर फंसे रहे। दरअसल विमान की लैंडिंग के बाद उसका दरवाजा ही नहीं खुल पाया।
इस फ्लाइट में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और रायपुर की मेयर मीनल चौबे भी सवार थीं। विमान दोपहर 2:20 बजे रायपुर में लैंड किया, लेकिन यात्रियों को दरवाजा खुलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
17 जून को कोच्चि से दिल्ली जा रहे इंडिगो के विमान 6E-2706 को एक ईमेल पर बम की धमकी मिलने के बाद नागपुर में आपात स्थिति में उतारना पड़ा।
विमान में 157 यात्री और छह क्रू सदस्य सवार थे। यह फ्लाइट सुबह 9:31 बजे रवाना हुई थी और दोपहर 12:35 बजे दिल्ली पहुंचनी थी, लेकिन विमान को 11:54 बजे नागपुर में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।
बम स्क्वॉड और सुरक्षा एजेंसियों ने विमान की जांच की, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला। हालांकि, इस घटना ने यात्रियों में भारी दहशत फैला दी।
16 जून को गोवा से लखनऊ जा रही फ्लाइट 6E-6811 में मध्य हवा में अचानक टर्बुलेंस आ गया। एयरलाइन ने बताया कि पश्चिमी भारत में सक्रिय मानसून प्रणाली इसकी वजह बनी।
हालांकि, पायलट और क्रू ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार स्थिति को संभाला और विमान को सुरक्षित रूप से लखनऊ में उतारा गया। एयरलाइन ने इस पर ज्यादा विवरण नहीं दिया, लेकिन यात्रियों ने सोशल मीडिया पर टर्बुलेंस के दौरान डरावने पल साझा किए।
पिछले महीने भी इंडिगो की एक फ्लाइट दिल्ली से श्रीनगर जा रही थी, जिसमें 227 यात्री, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी था, सवार थे।
श्रीनगर पहुंचने से पहले विमान भारी बारिश और ओलावृष्टि की चपेट में आ गया, जिससे काफी टर्बुलेंस हुआ। पायलट ने आपात स्थिति की सूचना श्रीनगर ATC को दी और विमान को सुरक्षित उतार दिया गया।
हालांकि, लैंडिंग के दौरान विमान का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। सौभाग्य से कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन यह घटना भी एयरलाइन के रखरखाव और योजना पर सवाल उठाती है।
पिछले कुछ हफ्तों में इंडिगो की फ्लाइट्स में हुई लगातार पांच गंभीर घटनाएं चिंता का विषय हैं — चाहे वह तकनीकी खराबी हो, टर्बुलेंस हो, या बम की धमकी।
इन घटनाओं में कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ, लेकिन बार-बार तकनीकी गड़बड़ियां और सुरक्षा चूकें इस बात का संकेत हैं कि एयरलाइन को अपने रखरखाव, निरीक्षण और प्रशिक्षण प्रणाली पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
अभी तक DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) या इंडिगो की ओर से इन घटनाओं पर कोई ठोस आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शुक्रवार की घटना पर भी इंडिगो ने कोई बयान जारी नहीं किया।
क्या यात्रियों की सुरक्षा केवल किस्मत पर छोड़ दी गई है? या फिर एयरलाइन अब इतनी बड़ी हो गई है कि उसे जवाबदेही की चिंता ही नहीं?
एक बार की घटना को हादसा कहा जा सकता है, दो बार को गलती — लेकिन जब हर हफ्ते एक नई घटना सामने आती है, तो यह एक पैटर्न बन जाता है।
यदि इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइन अपने तकनीकी संचालन, सुरक्षा मानकों और यात्री अनुभव को गंभीरता से नहीं लेती, तो वह दिन दूर नहीं जब कोई घटना महज चेतावनी नहीं, बल्कि बड़ी त्रासदी बन जाएगी।