ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे संघर्ष को हफ्तेभर से ज्यादा हो चुका है। दोनों देश एक-दूसरे पर जबरदस्त हमले कर रहे हैं। इसका असर कनाडा में हुई जी-7 की बैठक में भी दिखा। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड बीच में ही बैठक छोड़कर अमेरिका लौट गए। जी-7 की बैठक में भारत ने जिस तरह से अपना पक्ष रखा उसकी भी चर्चा हो रही है। दुनिया के मौजूदा हालात और उसका भारत पर कैसा असर पड़ सकता है। इसी पर इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और अवधेश कुमार मौजूद रहे।
रामकृपाल सिंह: जी-7 की बैठक से पहले बहुत सी बातें हो रही थीं, भारत को बुलाया जाएगा या नहीं बुलाया जाएगा। इस सबके बीच भारत को बुलाया गया। प्रधानमंत्री मोदी वहां गए। भारत ने जी-7 में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की डोनाल्ड ट्रंप से पहलगाम हमले के बाद बात हुई थी। इसके बाद आपसे मेरी अब बात हो रही है। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान से संघर्ष के दौरान ट्रंप से पीएम मोदी की कोई बात नहीं हुई। कुल-मिलाकर के यह कहा जा सकता है कि आदमी ज्यादा बोलने से तकलीफ उठाता है। जिस तरह का माहौल हो रहा है। जी-7 ने माना कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
अवधेश कुमार: ईरान-इराक युद्ध जब हुआ था तब कोई परिणाम नहीं आया था। इस बार जो युद्ध हो रहा है उसका परिणाम जरूर आएगा। इस्राइल वही कर रहा है जो करना चाहिए। युद्ध की रणनीति देख लीजिए। इस्राइल का निशाना ईरान के डिफेंस सेंटर हैं। वो उन्हें खत्म करने की कोशिश कर रहा है। ईरान के ज्यादातर हमले नागरिक क्षेत्रों में हो रहे हैं। ईरान के सेना और सुरक्षा से जुड़े 14 अहम लोग मारे जा चुके हैं।