बिहार में चुनाव तैयारियों और महगठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने प्रतिक्रिया दी है। कन्हैया ने शुक्रवार को कहा कि सीएम चेहरे को लेकर महागठबंधन में किसी तरह की दुविधा या भ्रम नहीं है बल्कि यह भ्रम एनडीए में है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए का चेहरा होंगे या नहीं, यह तय नहीं है। कन्हैया ने कहा कि महागठबंधन में राजद सबसे बड़ी पार्टी है, वह सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जाहिर है कि वह ज्यादा सीटें जीतेगी तो सीएम भी उनका होगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रक्रिया के तहत महागठबंधन बिहार चुनाव की तैयार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में चेहरा नहीं बल्कि मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।
Kanhaiya Kumar ने आगामी बिहार चुनाव पर कहा कि, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुख्यमंत्री का फैसला जनता करेगी, जिसके पास बहुमत होगा, वही सरकार बनाएगा। स्वाभाविक रूप से, राजद चुनाव लड़ेगी और अधिक सीटें जीतेगी, इसलिए मुख्यमंत्री राजद से ही होगा। इस प्रक्रिया में कोई भ्रम या संकट नहीं है। भ्रम एनडीए के भीतर है। इस बात को लेकर भ्रम है कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, और नीतीश जी मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे या नहीं। तेजस्वी यादव 'महागठबंधन' का सबसे प्रमुख चेहरा हैं, लेकिन अंतत: सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी ही आगे होगी..."
कन्हैया ने कहा, 'सीएम कौन बनेगा, इस जनता तय करती है, जिनके पास संख्या बल होगा, वह सीएम बनेगा। आरजेडी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो जाहिर है कि वह ज्यादा सीटें जीतेगी। संख्या बल उसके पास होगा। सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं है। इसे लेकर एनडीए में है। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इस चुनाव में नीतीश चेहरा होंगे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में चेहरा महत्वपूर्ण नहीं होता, मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग जानबूझकर सीएम फेस के नाम पर जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं। इसलिए महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के मामले को उठाकर ध्यान भटकाने की साजिश रच रहे हैं। जैसे ही भाजपा को मौका मिलेगा, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर अपने नेता को बिहार में स्थापित करेगी। बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है। वह एनडीए सरकार के छल को समझ चुकी है। संविधान विरोधी लोगों को जनता पसंद नहीं करती है।