मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग में बने फ्लाईओवर की डिजाइन और निर्माण में हुई चूक पर मोहन सरकार ने सख्त कदम उठाया है। फ्लाईओवर में खतरनाक 90 डिग्री मोड़ दिए जाने पर जांच के बाद लोक निर्माण विभाग के दो मुख्य अभियंता संजय खांडे और जी.पी. वर्मा सहित सात इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, सेवानिवृत एक अधीक्षण यंत्री पर विभागीय जांच शुरू की गई है। आपको बता दें कि अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के मंच से यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था, जिसमें मुख्यमंत्री ने ब्रिज की खामियों को सुधारने और दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि ऐशबाग आरओबी के निर्माण में जो खामियां सामने आईं, वे बेहद गंभीर हैं। आरओबी के त्रुटिपूर्ण डिजाइन के लिए निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट दोनों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आरओबी में जरूरी सुधार के लिए एक कमेटी बनाई गई है। जब तक सभी सुधार कार्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक आरओबी का लोकार्पण नहीं किया जाएगा।
आपको बता दें कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि 2018 में पहली बार पेश किए गए डिजाइन को रेलवे ने नकार दिया था। फिर 120 डिग्री की निर्माण संचरना पर सहमति बनी। इसमें सर्कुलर पिलर का प्रावधान था। उनका कहना है कि रेलवे ने अपनी जगह पर दीवारनुमा पिलर बना दिए। स्पान पर कैप जैसा डिजाइन भी नहीं बना। इसके चलते कम जगह में ब्रिज का निर्माण करवाना पड़ा। दूसरी तरफ रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी को ब्रिज की डिजाइन के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार इंडियन रोड कांग्रेस के 38 कोड में प्रावधान है कि यदि कहीं पर जमीन की समस्या हो तो शहरी इलाकों में न्यूनतम 30 किमी प्रति घंटे रफ्तार से आवागमन लायक ब्रिज का निर्माण कराया जा सकता है।