परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर कर्मचारियों ने नीलम की जांच की और उनकी नब्ज ठीक से नहीं चलने की बात कही। इसके बाद परिवार के लोगों को नीचे इंतजार करने के लिए कहा गया। आशीष का दावा है कि करीब डेढ़ घंटे तक परिजन इस उम्मीद में इंतजार करते रहे कि नीलम की हालत में सुधार होगा। बाद में एक रिश्तेदार ऊपर गए तो उन्हें नीलम की मौत होने की जानकारी दी गई।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर भेलूपुर थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने परिजनों को समझाकर शांत कराया। वार्ड नंबर 39 के पार्षद सुरेश पटेल उर्फ गुड्डू भी मौके पर मौजूद रहे।
परिजन अब प्रज्ञा हॉस्पिटल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मरीज को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजने के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।
वहीं, ओरियाना हॉस्पिटल प्रशासन का कहना है कि नीलम को जब अस्पताल लाया गया, तब उनकी हालत गंभीर थी। उन्हें बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, परिजनों की शिकायत की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के तथ्यों के आधार पर की जाएगी।