आईआईटी बीएचयू के प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने रूस में चल रहे ब्रिक्स पर आधारित एक सम्मेलन में इलेक्ट्रॉनिक कचरा पुनर्चक्रण पर शोध प्रस्तुत किया। यह इलेक्ट्रॉनिक कचरे से 100 प्रतिशत तांबा और 92 प्रतिशत सोना की पुनर्प्राप्ति पर आधारित शोध था। मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर कमलेश ने रूस के नालचिक में एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन जियो सस्टनेबिलिटी ब्रिक्स में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण करने का तरीका बताया। अध्ययन के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक कचरे में सीसा, पारा, कैडमियम और ब्रोमिनयुक्त एपॉक्सी रेजिन जैसे विषैले पदार्थ पाए जाते हैं। वहीं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगे प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स के सोना, चांदी, तांबा और टैंटलम जैसी मूल्यवान धातुओं के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। शोध में टैंटलम कैपेसिटर से 99 प्रतिशत मैंगनीज की पुनर्प्राप्ति की गई, जिसकी शुद्धता 99.6 प्रतिशत रही। कम मात्रा यानी पीपीएम स्तर पर मौजूद धातुओं की पुनर्प्राप्ति के लिए पॉलिमर इंक्लूजन मेम्ब्रेन तकनीक का भी अध्ययन किया गया। सम्मेलन में रूस, ब्राजील, चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की और उज्बेकिस्तान सहित विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। ब्यूरो