बागपत के निवड़ा गांव में शहजादी के पिता मां और बेटा शादान
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मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि कुछ अपराध ऐसे होते हैं, जिनकी गंभीरता को केवल कानूनी धाराओं और साक्ष्य की भाषा में पूरी तरह व्यक्त करना कठिन होता है। जीवित अबला महिला का आग की लपटों में घिरना, सहायता के लिए संघर्ष करना और अंतत जीवन खो देना ऐसी मानवीय त्रासदी है जो अपराध के परिणाम से कहीं अधिक व्यापक पीड़ा को दर्शाती है।
अदालत ने 77 पेज के फैसले में लिखा कि जनता से पूछना चाहते हैं कि यह आग कब बुझेगी। कब तक अबला महिलाओं को जलाकर मारा जाता रहेगा और पूरा सिस्टम सिर्फ वादकारी का हित सर्वोपरि में सिर्फ अभियुक्त का ही हित और अधिकार देखेगा। स्वयं को बचाने की असहायता इस अपराध को साधारण हत्या से कहीं अधिक जघन्य बनाती है।
यह कृत्य न केवल पीड़िता के जीवन और गरिमा पर आघात है, बल्कि वैवाहिक विश्वास एवं उस सामाजिक संस्था के प्रति भी गंभीर आघात है, जिसमें पति-पत्नी एक-दूसरे की सुरक्षा और सहारे के लिए अपेक्षित होते हैं। पीड़िता की असहाय स्थिति और समाज पर उसके प्रभाव को समग्रता में देखते हुए यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि यह मामला अति-दुर्लभतम में दुर्लभ श्रेणी में आता है।
हत्या का यह तरीका अत्यंत निर्मम एवं पाश्विक है। यदि दंड देते समय ऐसे सिद्धदोष के प्रति सहानुभूति दर्शित की जाएगी तो यह भविष्य में इस बात की मिसाल बन जाएगा कि कोई भी विवाहित पति अपनी पत्नी को जिन्दा जलाकर मार दे और न्यायालय उसके साथ सहानुभूति प्रदर्शित करे। इसलिए प्रश्नगत प्रकरण में सिद्धदोष नदीम को मृत्युदंड दिया जाना ही एकमात्र विकल्प है।
बाबा आदम से लेकर लिखी लैला-मंजनू और शीरी-फरहाद की दास्तां
अदालत ने फैसले में खुदा की ओर से बाबा आदम को बनाने और अजाजील की कहानी भी लिखी। उदास बाबा आदम की बाईं पसली से नारी के जन्म को बयान किया, जिसका नाम हव्वा रखा गया। गेहूं का दाना खाने के कारण आदम-हव्वा को खुदा ने पृथ्वी पर भेज दिया। दोनों पति-पत्नी एक-दूसरे से प्यार करते थे।
मुसीबत सहते हुए धरती पर रहे। इस्लामी मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति अपनी पत्नी की हत्या करेगा वह दोजख में भेजा जाएगा। पति-पत्नी का संबंध प्यार-मोहब्बत पर आधारित होता है। लैला-मंजनू और शीरी-फरहाद के प्यार-मोहब्बत के किस्सों का उल्लेख किया जाना आवश्यक है। प्रेम संबंधों के संबंध में यह बताते हैं कि प्रेम अर्थात् मोहब्बत में किसी की जान ली नहीं जाती है, ऐसा होता है प्रेम का संबंध अथवा पति-पत्नी का संबंध।
निकाह सुन्नत...माना गया है पवित्र कार्य
मुस्लिम समाज में निकाह नामक संस्था का बड़ा महत्व है। हजरत मोहम्मद साहब का कथन है कि निकाह मेरी सुन्नत है। जो लोग जीवन के इस ढंग को नहीं अपनाते हैं वह मेरे अनुयायी नहीं हैं। निकाह को पुण्य कार्य माना गया है। मुस्लिम विधि की प्रसिद्ध पुस्तक रघुल मोहतार में यह कहा गया है कि बाबा आदम के समय से आज तक हम लोगों के लिए रखा गया और जन्नत में भी होने वाला कोई ऐसा इबादत का कार्य नहीं है, सिवाय निकाह और इमान के।
अदालत ने किया इंसाफ, नदीम को लगे फांसी: दिलशाद
निवाड़ा गांव की शहजादी की शाहपुर में हत्या के बाद से उसका बेटा शादान ननिहाल में ही रह रहा है। सोमवार को अदालत के फैसले के बाद वादी पिता दिलशाद ने कहा कि बेटी के साथ मारपीट की गई थी। हम अदालत के फैसले से संतुष्ट है। जैसा हमारी बेटी के साथ किया गया, वैसा सजा ही नदीम को मिलनी चाहिए। दोषी को फांसी लगनी चाहिए। वारदात के बाद उन्हें शहजादी के ससुरालियों ने जानकारी नहीं दी थी, किसी तरह पड़ोसियों से मामले की जानकारी मिली।
नदीम का भाई बोला... हम जाएंगे हाईकोर्ट
नदीम को फांसी की सजा के बाद उसके भाई नईम ने कहा कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। प्रकरण में नदीम पांच साल जेल में रहा और वर्तमान में जमानत पर चल रहा था। कपड़े की फेरी लगाकर वह गुजारा करता था। 26 अगस्त को उसे दोबारा हिरासत में लिया गया। हम अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं है।
पत्नी को जिंदा जलाने वाले नदीम को फांसी की सजा
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने पत्नी को जिंदा जलाने वाले नदीम को फांसी की सजा सुनाई। एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वादी पिता समेत तथ्य के अन्य गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने के बावजूद मजिस्ट्रेट को मृत्यु पूर्व दिया गया बयान सजा का आधार बना।
न्यायालय ने फैसले में लिखा कि अबला नारी को जिंदा जलाने वाला सहानुभूति का हकदार नहीं है, उसे मृत्युदंड दिया जाना ही उचित है। अदालत ने सवाल उठाया कि यह आग कब बुझेगी। कस्बा शाहपुर में आठ साल पहले घरेलू विवाद में शहजादी (23) को मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जला दिया गया था।
बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने अपनी पुत्री शहजादी का निकाह 10 जनवरी 2015 को शाहपुर की नई आबादी निवासी नदीम के साथ किया था। दंपती के घर में बेटे शादान का जन्म हुआ। 23 जुलाई 2018 को रात 8:30 बजे विवाहिता के साथ मारपीट कर उसके ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी गई थी।
बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज और आनंद हॉस्पिटल मेरठ में उपचार कराया गया। गंभीर हालत के कारण दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 28 जुलाई 2018 को उसकी मृत्यु हो गई थी। शहजादी का शरीर करीब 98 प्रतिशत तक जल चुका था। मौत की वजह जलना और सेप्टिक शॉक पाया गया था।
वादी दिलशाद ने प्राथमिकी में दहेज के लिए प्रताड़ित करने, बाइक और एक लाख रुपये की मांग का आरोप लगाते हुए शहजादी के पति नदीम, सास शमशीदा और ननद सोनी को नामजद किया था। पुलिस ने जांच के बाद दहेज हत्या के अलावा वैकल्पिक तौर पर हत्या की धारा में अदालत में तीनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
आरोपी सास की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी। सह-अभियुक्त ननद सोनी को साक्ष्य के अभाव में पिछले महीने 26 अगस्त बरी कर दिया गया था। पति पर दोष सिद्ध हुआ था। अभियुक्त पर प्रकरण में दहेज हत्या का मामला खारिज हो गया लेकिन साशय हत्या (धारा 302) सिद्ध हुआ। अदालत ने सोमवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए दोषी नदीम को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाह पेश किए।
शौहर को सजा तक ले गए शहजादी के आखिरी शब्द
24 जुलाई 2018 को शाम 05:35 बजे सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग के आईसीयू में भर्ती शहजादी का बयान दर्ज करने तत्कालीन कार्यपालक मजिस्ट्रेट/तहसीलदार (हौज खास सब-डिवीजन, दिल्ली) अशोक कुमार पहुंचे। पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी तीन साल पहले नदीम से हुई थी। पति ने एक साल ठीक रखा, उसके बाद शराब पीकर लड़ना-पीटना शुरू कर दिया।
बात-बात पर गाली देना और तलाक की धमकी देता था। 23 जुलाई 2018 की शाम लगभग सात बजे नदीम बाहर से शराब पीकर आया और पिटाई की। खाना खाने के बाद उसने फिर पिटाई की और कहा कि तुझे तलाक दूंगा। रात 08:30 बजे मेरे ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण अदालत ने मृत्युपूर्व दिए बयानों को महत्वपूर्ण मानते हुए दोषी को सजा सुनाई।