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बरेली: मच्छरों के हॉटस्पॉट बदले, अब मीरगंज और फतेहगंज पश्चिमी इलाके में मलेरिया का खतरा

Mon, 05 Oct 2026 11:34 AM IST
Mukesh Kumar अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली जिले में मलेरिया के हॉटस्पॉट बदल गए हैं। पहले के मुकाबले अब दूसरे इलाके अधिक प्रभावित दिख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मच्छरों की ब्रीडिंग साइट इसकी मुख्य वजह है। नदी किनारे कटान और खेतों-तालाबों में भरा पानी भी अहम कारण हैं।
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फॉगिंग करता कर्मचारी (फाइल) - फोटो : विभाग
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विस्तार
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बरेली जिले में मलेरिया के हॉटस्पॉट बदल रहे हैं। पहले जहां मच्छरों का प्रकोप ज्यादा था, अब वहां स्थिति सामान्य हो रही है। दूसरे इलाके अधिक प्रभावित नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, मच्छरों की ब्रीडिंग साइट, नदी किनारे कटान, खेतों-तालाबों में भरा पानी इसकी अहम वजह बन रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में मीरगंज, 2024 में भमोरा, 2025 में मझगवां, 2026 में फिर भमोरा में मलेरिया मरीजों की तादाद बढ़ी थी। वर्ष 2018 से 2021 तक मझगवां और भमोरा क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहे। वर्ष 2022 से मीरगंज में मच्छरों का डंक बढ़ने लगा था। कीट विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार के मुताबिक, मच्छरों की संख्या और उनका फैलाव सीधे ब्रीडिंग साइट से जुड़ा है। 

रामगंगा और अन्य नदियों के किनारे बने छोटे गड्ढे, कटान वाले हिस्सों में जलभराव से एनाफिलीज मच्छर के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। मीरगंज, फतेहगंज पश्चिमी के कुछ हिस्से नदी के पास होने से निगरानी के लिहाज से अहम हैं। पहले आंवला, भमोरा, रामनगर, फरीदपुर क्षेत्र में मलेरिया के केस सर्वाधिक रहे। आंवला में बारिश के बाद तालाबों, खेतों में भरा पानी मच्छरों की ब्रीडिंग के लिहाज से संवेदनशील है।

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खून चूसकर भाग जाते हैं मच्छर
कीट विशेषज्ञ के मुताबिक, मच्छरों की आदतों और कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। डेंगू का कारक एडीज मच्छर खून चूसकर सीधे घर से निकल जाता है। वजह एंडोफिलिक, एक्सोफिलिक टर्म होता है। वहीं, एनाफिलीज मच्छर खून चूसने के बाद अक्सर घर के भीतर ही छिपा रहता है और प्रजनन के लिए बाहर जाता है। इसके पर्दों, कपड़ों और बिस्तर की सिलवटों में छिपे रहने की आशंका रहती है।

ब्रीडिंग साइट खत्म करना भी जरूरी
जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र कुमार के मुताबिक, मलेरिया की रोकथाम के लिए सिर्फ मरीजों की पहचान ही नहीं, बल्कि मच्छरों की ब्रीडिंग साइट को खत्म करना भी जरूरी है। क्षेत्र बदलने के साथ निगरानी और फील्ड सर्विलांस को भी उसी के अनुरूप केंद्रित करना पड़ता है। बीते दो साल में मलेरिया, डेंगू के मामले घटे हैं। वर्तमान में मलेरिया के 425, डेंगू के दस केस हैं।

घर के आसपास रखें सफाई
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने कहा कि मच्छरों के व्यवहार को देखते हुए घरों में स्प्रे या फॉगिंग पर्याप्त नहीं है। घर के अंदर छिपने वाले मच्छरों पर नियंत्रण के साथ उनके प्रजनन स्थल खत्म करना भी जरूरी है। घरों के आसपास सफाई जरूरी है। विभागीय टीमें सक्रिय हैं, पर जनसहभागिता भी आवश्यक है।
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