झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से आयोजित 36 परीक्षाओं में से नौ में बड़े पैमाने पर धांधली और पदों की खरीद-बिक्री किए जाने का खुलासा हुआ है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच के अनुसार, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षाएं संचालित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल से जुड़े सिंडिकेट ने कथित तौर पर पूरी व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले लिया था। आरोप है कि इस गिरोह ने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमों को ताक पर रखकर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया, सीटें बेचीं और करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया।
प्रश्नपत्र लीक से ओएमआर शीट में हेराफेरी तक के आरोप
जांच अधिकारियों के अनुसार, सिंडिकेट ने अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए प्रश्नपत्र लीक करने से लेकर ओएमआर शीट में हेराफेरी करने तक के तरीके अपनाए। आरोप है कि ओएमआर शीट को सुरक्षित कमरे में बिना सील के रखा गया और बाद में खाली छोड़े गए गोलों को भरा गया। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों के बाहर गुप्त ठिकानों पर उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाए जाने के साक्ष्य भी जांचकर्ताओं को मिले हैं।
वन क्षेत्र पदाधिकारी परीक्षा में भी गड़बड़ी का आरोप
जांच के मुताबिक, वन क्षेत्र पदाधिकारी परीक्षा के 170 पदों के लिए मुख्य साजिशकर्ता अभय तिवारी, टीडीपीएल के लेखाकार रक्षक सिंह और कोचिंग संचालक संजीत कुमार के करीबियों को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से सफल कराया गया। आरोप है कि इस परीक्षा की मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं गुप्त ठिकानों पर लिखवाई गईं। जांच अधिकारियों ने इस प्रक्रिया से जुड़ी वीडियो रिकॉर्डिंग भी जब्त की है। सहायक वन संरक्षक परीक्षा के 78 पदों पर भी मुख्य आरोपियों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। अधिकारियों ने फॉरेंसिक जांच के दौरान एक आरोपी के घर से मिले मॉडल उत्तरों का मिलान परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं से किया।
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी परीक्षा में भी सवाल
जांचकर्ताओं के अनुसार, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी परीक्षा के 64 पदों के लिए डेटा प्रोसेसिंग आईटीआई की आड़ में कथित तौर पर गड़बड़ी की गई। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए मुख्य आरोपी की पत्नी समेत कई अभ्यर्थियों का चयन कराया गया।
झारखंड पात्रता परीक्षा के लिए एजेंसी के चयन पर भी सवाल
झारखंड पात्रता परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी आयोग ने 'बिंसिस' नाम की एजेंसी को सौंपी थी। इससे पहले कर्मचारी चयन आयोग की प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच के दौरान पुलिस इस एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल उठे हैं।
सहायक लोक अभियोजक और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी परीक्षा में भी कथित फर्जीवाड़ा
आरोपपत्र के अनुसार, सहायक लोक अभियोजक प्रारंभिक परीक्षा में दूसरे राज्यों के फर्जी कंप्यूटर प्रमाणपत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों को सफल कराने का आरोप है। वहीं, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी परीक्षा का परिणाम भी कथित तौर पर मनमाने तरीके से तैयार किया गया। जांच में बताया गया है कि मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने स्वयं खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी की लिखित परीक्षा पास की थी और साक्षात्कार में शामिल हुआ था। CID की जांच और अदालत में दाखिल आरोपपत्र के बाद इन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और सिंडिकेट की भूमिका को लेकर मामला गंभीर हो गया है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।