सीए बनने के सपने के साथ एमए तक पढ़ाई कर चुकी बाड़मेर की बेटी रुचिका मालू अब सांसारिक जीवन की दौड़ से अलग संयम की राह पर कदम बढ़ाने जा रही हैं। आज लाडनूं में वह आचार्यश्री महाश्रमणजी के कर कमलों से दीक्षा ग्रहण करेंगी। बचपन से ही धर्म के प्रति विशेष लगाव रखने वाली मुमुक्षु रुचिका अब संयम में सीए यानी चारित्र अंगीकार के संकल्प के साथ संयम के कठिन जीवन को धारण कर अपनी नई पहचान बनाने जा रही हैं।
बचपन से मिले धार्मिक संस्कार
मुमुक्षु रुचिका मालू बताती हैं कि परिवार से ही उन्हें धार्मिक संस्कार मिले हैं और बचपन से लेकर अब तक धर्म की राह दिखाते हुए बताया गया कि जीवन में कुछ कार्य करो, लेकिन धर्म का होना जरूरी है। बचपन में जब कभी सामायिक (आत्मचिंतन व ध्यान) नहीं करती थीं तो मम्मी से डांट खानी पड़ती थी। वह कभी-कभी कमरे में बंद करके रख देती थीं, जब तक सामायिक पूरी नहीं हो जाती थी। दादाजी और पापा हर रोज मंदिर ले जाते थे। इस प्रकार बचपन से ही घर-परिवार से धर्म को लेकर संस्कार मिले हैं। रुचिका ने बताया कि दादाजी और पापा चाहते थे कि हमारे घर से कोई दीक्षित बने, लेकिन मम्मी और दादी इस बात पर राजी नहीं थे। हालांकि बाद में मम्मी इस बात पर मान गईं, परंतु दादी नहीं चाहती थीं कि हम लोग घर में सुख-सुविधाओं में रहें और उनकी पोती संयम जैसे कठिन पथ पर जाए।
दादी से दीक्षा की अनुमति मांगने में लगता था डर
रुचिका का कहना है कि दीक्षा की आज्ञा के लिए दादी को मनाने का प्रयास करते तो उनकी तबीयत खराब हो जाती। ऐसे में मन में डर लगा रहता था कि कहीं उन्हें कुछ न हो जाए। जिसके चलते उनके सामने इस बात का जिक्र करना ही छोड़ दिया। रुचिका ने बताया कि जुलाई वर्ष 2021 में दादी का देहावसान हो गया। उनकी मृत्यु के कुछ दिन बाद ही अचानक सपना आया, जिसमें उन्होंने दीक्षा की अनुमति दी। इसके साथ ही पूरे परिवार की अनुमति से दीक्षा लेने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि परिवार में दादा मेवाराम मालू, पापा रुपेश जी व्यापारी और माता लीला देवी गृहिणी हैं। घर में चार बहनें हैं और वह सबसे बड़ी हैं। ताऊजी के परिवार में दो भाई-बहन भी हैं।
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सीए बनने के सपने के साथ की पढ़ाई
रुचिका ने बताया कि उन्होंने कॉलेज तक पढ़ाई की और चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए बनने के सपने के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की। मालू ने कहा कि शुरू से ही लक्ष्य तय था कि मुझे यह सांसारिक मोह-माया और दिखावटी जीवन नहीं जीना है और दीक्षा लेनी है। इसके बाद समझ आया कि सीए का एक अर्थ चारित्र अंगीकार का भी होता है, जो अब मैं करने जा रही हूं।
गर्ल्स कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव भी जीता
मुमुक्षु मालू ने बताया कि वह गर्ल्स कॉलेज में छात्रसंघ का चुनाव जीतकर वर्ष 2015 में उपाध्यक्ष बन चुकी हैं। चुनाव में उनकी प्रतिद्वंद्वी उनकी फ्रेंड थीं, जो चुनाव हार गई थीं। इस बात का उन्हें बहुत दुख हुआ, क्योंकि वह कभी किसी को भी दुख नहीं देना चाहती हैं।उन्होंने बताया कि पांच साल तक लाडनूं के परमार्थिक शिक्षण संस्थान में रहकर आध्यात्मिक व धार्मिक ज्ञान अर्जित किया। गुरु की निश्रा में रहकर कई तप, तपस्या और विहार करने का अवसर मिला है। सभी को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में संस्कारों का होना बेहद जरूरी है। इसलिए अपने संस्कारों को कभी न भूलें और धर्म से जुड़े रहें।