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एफडी और म्यूचुअल फंड में क्या है अंतर? यहां समझें किसमें मिलता है अधिक रिटर्न

Mon, 14 Sep 2026 03:49 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Fixed Deposit vs Mutual Fund Returns: एफडी और म्यूचुअल फंड दोनों ही निवेश के लिए सबसे चर्चित माध्यम हैं। मगर अक्सर ही इन दोनों को लेकर कुछ लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। अगर आपको भी एफडी और म्यूचुअल फंड से जुड़े कुछ सवाल हैं तो आपको ये लेख जरूर पढ़ना चाहिए।
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एफडी और म्यूचुअल फंड अंतर - फोटो : AI
FD vs Mutual Fund Basic Difference: अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने और उस पर बेहतर ब्याज पाने के लिए लोग अक्सर फिक्स्ड डिपॉजिट या म्यूचुअल फंड में निवेश का रास्ता चुनते हैं। हालांकि, इन दोनों निवेश विकल्पों की कार्यप्रणाली, जोखिम और मिलने वाले रिटर्न में बहुत बड़ा अंतर होता है।

जहां एफडी पूरी तरह सुरक्षित और निश्चित रिटर्न देने के लिए जानी जाती है, वहीं म्यूचुअल फंड बाजार के जोखिम के साथ आता है लेकिन इसमें ज्यादा मुनाफा कमाने का मौका मिलता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई के लिए दोनों में से कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।
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जोखिम और गारंटीड रिटर्न में मुख्य अंतर - फोटो : AdobeStock
जोखिम और गारंटीड रिटर्न में मुख्य अंतर
  • बैंक एफडी में आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और आपको पहले से तय दर पर गारंटीड रिटर्न मिलता है।
  • इसके विपरीत म्यूचुअल फंड का पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है। 
  • इसमें रिटर्न की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती, क्योंकि इसका मुनाफा बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। 
  • इसलिए एफडी उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो बिल्कुल भी जोखिम नहीं लेना चाहते।
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रिटर्न और महंगाई से लड़ाई में कौन है आगे? - फोटो : AdobeStock
रिटर्न और महंगाई से लड़ाई में कौन है आगे?
  • रिटर्न के मामले में म्यूचुअल फंड आमतौर पर एफडी से आगे निकल जाता है। 
  • जहां एफडी में आपको सालाना 6 से 7 फीसदी के आसपास तय ब्याज मिलता है, वहीं म्यूचुअल फंड लंबे समय में 12 से 15 फीसदी तक का औसतन रिटर्न दे सकता है।
  • अगर आप महंगाई दर को पछाड़कर बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

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पैसा निकालने यानी लिक्विडिटी के नियम - फोटो : AdobeStock
पैसा निकालने यानी लिक्विडिटी के नियम
  • एफडी को मैच्योरिटी से पहले समय से पहले तोड़ने पर बैंक पेनल्टी या जुर्माना लगाते हैं, जिससे आपका ब्याज कम हो जाता है।
  • इसके मुकाबले ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड में पैसा निकालना ज्यादा आसान होता है।
  • आप जब चाहें अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ ही दिनों में बिना किसी बड़े नुकसान के अपना पैसा अपने बैंक खाते में वापस पा सकते हैं।
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कमाई पर लगने वाले टैक्स का गणित समझें - फोटो : AdobeStock
कमाई पर लगने वाले टैक्स का गणित समझें
  • एफडी से मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार आयकर लगता है, और अगर ब्याज एक तय सीमा से अधिक हो तो बैंक टीडीएस भी काटते हैं।
  • दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड में एक साल से अधिक समय तक पैसा रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के तहत छूट का फायदा मिलता है, जिससे आपको टैक्स में ज्यादा बचत होती है।

अस्वीकरण: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। योजना से जुड़े सभी दस्तावेजों और जोखिमों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। इसमें निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
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