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लखनऊ में बाढ़: जहां दो दिन पहले था क्रिकेट का रोमांच, अब दिख रहा गोमती का उफान, पैदल निकलना भी दूभर, तस्वीरें

Thu, 08 Oct 2026 02:18 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। गोमती उफान पर है। वहीं, इकाना स्टेडियम के बाहर पानी भरा है। गोमती रिवरफ्रंट पानी में डूबा हुआ है। तस्वीरों में देखेें मंजर
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- फोटो : amar ujala
मंजर कितनी तेजी से बदल सकता है, इसकी बानगी बुधवार शाम गोमतीनगर विस्तार में देखने को मिली। जिस इकाना स्टेडियम में मंगलवार रात भारत-वेस्टइंडीज का रोमांच देखने के लिए करीब 48 हजार क्रिकेट प्रेमी जुटे थे, ठीक 24 घंटे बाद उसी इलाके की सड़कें पानी में डूब गईं।

गोमती नदी के बढ़े जलस्तर का असर रात होते-होते इतना बढ़ गया कि प्लासियो मॉल के सामने की दोनों लेन पूरी तरह जलमग्न हो गईं। मुख्य सड़क दरिया जैसी नजर आने लगी।
 
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इकाना स्टेडियम के पास हुआ जलभराव। - फोटो : amar ujala
शाम आठ बजे तक सड़क पर घुटनों तक पानी भर गया। वाहनों की रफ्तार थम गई। सुबह सूखी सड़क से ड्यूटी पर पहुंचीं प्लासियो मॉल की महिला कर्मचारियों और आसपास के दफ्तरों में काम करने वालों के लिए घर लौटना मुश्किल हो गया। पैदल निकलने की जगह नहीं बची और सार्वजनिक परिवहन भी नदारद रहा।
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फीनिक्स पलासियो मॉल के सामने जलभराव। - फोटो : amar ujala
पानी की तेज धार के बीच एक ऑटो भी बंद हो गया। लोगों ने धक्का देकर उसे किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला। दोपहर तक सड़क के किनारे तक सीमित पानी रात होते-होते प्लासियो चौराहे तक पहुंच गया।

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गोमती में डूबा रिवरफ्रंट। - फोटो : amar ujala
गोमतीनगर विस्तार में नदी के पानी का प्रवेश रोका
गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-7 और इकाना स्टेडियम के आसपास पहुंचे पानी को रिहायशी क्षेत्र में बढ़ने से रोकने के लिए एलडीए ने इकाना स्टेडियम के पीछे बोल्डर और मिट्टी से अस्थायी बांध बनाया है। इसके जरिये करीब ढाई घंटे में पानी का नया प्रवाह रोक दिया गया। इसके बाद क्षेत्र में जलस्तर करीब छह इंच कम हुआ। एहतियात के तौर पर सेक्टर-7 के अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी मिट्टी डालकर अवरोध बनाए गए हैं। एलडीए की टीमें क्षेत्र में 24 घंटे निगरानी कर रही हैं।
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- फोटो : amar ujala
20 कॉलोनियों में बिजली आपूर्ति ठप
बाढ़ के चलते फैजुल्लागंज की करीब 20 कॉलोनियों में बिजली आपूर्ति बंद है। इनमें पवन विहार, मामा कॉलोनी, कैलाश विहार, गोमती विहार, दुर्गापुरी, भार्गव कॉलोनी, अक्षय विहार, चौबे डेयरी, शिव शक्ति नगर, शिव विहार, पतंग मैदान, श्रीराम विहार, रामनगर, विष्णु विहार, जैन कॉलोनी, गणेश विहार, नंदा फार्म, संतकबीर नगर और कृष्ण लोक कॉलोनी शामिल हैं। वार्ड दो और चार में भी बाढ़ प्रभावित इलाकों के ट्रांसफार्मरों की बिजली बंद की गई है।
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- फोटो : amar ujala
गणेश विहार कॉलोनी में उतरा करंट, हादसा बचा, आननफानन में हटाई गई लाइन
फैजुल्लागंज के बाढ़ग्रस्त गणेश विहार कॉलोनी में बुधवार को करंट उतरने से बड़ा हादसा बच गया। करंट की चपेट में आने से एक राहगीर को झटका लगा। शिकायत मिलने के बाद बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर से 11 हजार वोल्ट की लाइन पूरी तरह हटा दी। उपकेंद्र कर्मियों के मुताबिक, बाढ़ का पानी ट्रांसफार्मर की पेटी तक पहुंचने के कारण करंट उतरने का खतरा था। इसी को देखते हुए डियो फ्यूज हटाकर ट्रांसफार्मर की बिजली पहले ही बंद कर दी गई थी। इसके बावजूद लाइन में बैंक फीड के कारण करंट आ आया। राहत शिविर में इसकी शिकायत पहुंचने के बाद विभागीय अधिकारियों को सूचना दी गई। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी और नगर आयुक्त तक भी सूचना पहुंची, जिसके बाद लाइन हटाई गई। अधिशासी अभियंता पंकज गुप्ता ने बताया कि ट्रांसफार्मर की पेटी के आसपास का पानी हटने के बाद ही बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी। 
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आईआईआईटी में घुसा बाढ़ का पानी। - फोटो : amar ujala
आईआईआईटी में घुसा बाढ़ का पानी, परीक्षाएं स्थगित
आईआईआईटी परिसर में भी गोमती का पानी घुस गया है। इस कारण संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां अगले आदेश तक बंद कर दी गई हैं। बुधवार को होने वाली एमटेक परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गईं। छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए हॉस्टल खाली कराकर छात्राओं को कैंसर अस्पताल और छात्रों को गोल्फ सिटी स्थित हॉस्टल में भेजा गया। स्थिति का जायजा लेने जिलाधिकारी विशाख जी और एसडीएम मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली और छात्रों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निचले इलाके में स्थित परिसर में पानी भरने से छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। संस्थान के सहायक कुलसचिव विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए परीक्षाएं अगले आदेश तक स्थगित की गई हैं। सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई है।

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- फोटो : amar ujala
फैजुल्लागंज में 52 नावें, निर्धारित रूट पर चलाने के निर्देश
गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच जिलाधिकारी विशाख जी ने बुधवार को फैजुल्लागंज के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित नागरिकों से बातचीत कर समस्याएं जानीं और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। फैजुल्लागंज में 52 नावें संचालित की जा रही हैं। इन्हें निर्धारित रूट पर चलाने और संवेदनशील इलाकों में नियमित भ्रमण के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम ने बताया कि प्रभावित नागरिकों के लिए चार राहत शिविर स्थापित किए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें दवाओं की किट वितरित कर रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में रात में पुलिस गश्त और कंट्रोल रूम से निगरानी की जा रही है। सांप व अन्य जीव-जंतुओं के बचाव के लिए वन विभाग की टीम भी तैनात है।

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- फोटो : amar ujala
दुबग्गा के तीन हजार घरों में घुसा पानी: दुबग्गा के लालजी टंडन वार्ड क्षेत्र में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हयात नगर न्यू कॉलोनी से बुधवार को 40 से अधिक परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं, टाड़खेड़ा, सैथा, उमरावखेड़ा, गुलमीखेड़ा, सुखलालखेड़ा और धनसिंहखेड़ा समेत दर्जन भर गांव के करीब तीन हजार घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इससे ग्रामीणों को पलायन और चोरी का भय सताने लगा है।

जोनल अधिकारी अमरजीत यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही नाव से परिवारों को गृहस्थी समेत सुरक्षित निकालकर रैन बसेरों में पहुंचाया जा रहा है। उमरावखेड़ा में पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। सीएचसी अधीक्षक केडी मिश्रा ने बताया कि बुधवार को 134 किट विभिन्न दवाएं वितरित की गईं। तीन दिनों में 807 किट बांटी जा चुकी है।
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- फोटो : amar ujala
डॉक्टरों की टीम अब तक 257 घरों का सर्वे कर चुकी है और मरीजों की जांच कर दवाएं दी जा रही हैं। दो गर्भवती महिलाओं को सीएचसी भेजा गया, जिसमें सैथा की महिला का सामान्य प्रसव हुआ। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। विवेक यादव, लवकुश, दिनेश और सुरेश समेत ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रात की गश्त बढ़ाने की मांग की है।

पशुपालक बेबस: लालजी टंडन वार्ड केउमरावखेड़ा में गोमती नदी के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से ग्रामीणों और किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बाढ़ के कारण गांव में आवागमन प्रभावित है। पशुपालकों को मवेशियों के लिए चोकर और अन्य जरूरी सामान नाव से ले जाना पड़ रहा है। पशुपालकों ने बताया कि मवेशियों का दूध भी बड़े कैन में भरकर नाव से बाहर लाया जा रहा है। 
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