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बैतूल: 1.14 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में कियोस्क संचालक नाबालिग निकला मास्टरमाइंड, असिस्टेंट मैनेजर अरेस्ट

Wed, 28 Oct 2026 10:37 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल

सार

बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में 1.14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड एक नाबालिग निकला। मामले में पुलिस कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है और अब तक करीब 22.33 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
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हिरासत में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में नेट बैंकिंग के जरिये और फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर हुई 1.14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में एक नाबालिग मास्टरमाइंड बनकर उभरा है। जांच में सामने आया कि गांव में कियोस्क सेंटर चलाने वाले नाबालिग ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर खाताधारकों को निशाना बनाया।

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पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के अनुसार आरोपी नाबालिग बैंक के सहायक प्रबंधक लोकेश गोहे की मदद से खाताधारकों के नेट बैंकिंग से जुड़े मोबाइल नंबर बदल देता था। इसके बाद रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। पुलिस अब तक मामले में छह अलग-अलग अपराध दर्ज कर चुकी है और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

इस तरह रची गई नेट बैंकिंग फ्रॉड की साजिश
पुलिस के अनुसार गांव के अनेक खाताधारक नेट बैंकिंग का इस्तेमाल तो करते थे लेकिन पासबुक अपडेट कराने बैंक शाखा आते थे। कियोस्क सेंटर चलाने के कारण नाबालिग उन पर नजर रखता था। उसने इसी पहचान का फायदा उठाकर ऐसे खातों को चिह्नित किया जिनसे आसानी से राशि निकाली जा सकती थी। 
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इस प्रक्रिया में सहायक प्रबंधक लोकेश गोहे की भूमिका अहम रही। उसकी बैंक आईडी का उपयोग कर नेट बैंकिंग में पंजीकृत मोबाइल नंबर बदले जाते थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस प्रक्रिया में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और सत्यापन के नियमों का पालन हुआ या नहीं।

रिश्तेदारों के खातों में भेजी एक करोड़ से अधिक की रकम
जांच में खुलासा हुआ कि धोखाधड़ी की 1.14 करोड़ रुपये की राशि में से बड़ी रकम टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी के खाते में ट्रांसफर की गई। इसके अलावा सहायक प्रबंधक लोकेश गोहे, उसकी मां शीला गोहे तथा नाबालिग के तीन रिश्तेदारों मिथिलेश सोनी, शैलेंद्र सोनी और मयंक सोनी के खातों में भी रकम पहुंची। 

पुलिस ने कियोस्क सेंटर की आईडी धारक मिथिलेश सोनी सहित अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सबसे पहले सहायक प्रबंधक, नाबालिग और गौरव को पकड़ा था। बाद में चार और गिरफ्तारियां की गईं। कियोस्क सेंटर की आईडी मिथिलेश के नाम थी लेकिन उसका संचालन नाबालिग करता था।

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महंगी कार की खरीद और संपत्ति की जब्ती
यह घोटाला जनवरी से चल रहा था और पिछले तीन-चार महीनों में इसमें तेजी आई। पहली शिकायत 21 अक्तूबर को सेवानिवृत्त शिक्षक गेंदाराम सोनी ने दर्ज कराई थी, जिनके खाते से 7 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। जांच के दौरान नाबालिग की संपत्ति और जीवनशैली भी पड़ताल के दायरे में आई।

उसने ठगी के रुपयों से लगभग 10 लाख रुपये की मारुति कार खरीदी थी। आरोपी महंगे मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस पूर्व में छह मोबाइल फोन, 8.28 लाख रुपये का सोना और 1.40 लाख रुपये की चांदी सहित कुल 22.33 लाख रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और एसओपी में चूक की जांच
पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या जीवित खाताधारकों को रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उनकी एफडी की रकम निकाली गई। मामले में छह जीवित खाताधारकों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र इस्तेमाल होने का संदेह है। दूसरी तरफ एक ही कर्मचारी द्वारा मोबाइल नंबर बदलने की सुविधा मिलने से बैंक की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। 
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पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एसओपी की अनदेखी को लेकर बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया है। पुलिस बैंक प्रक्रियाओं की जानकारी जुटाने के साथ खाताधारकों की सुरक्षा के लिए परामर्श जारी करने की तैयारी में है।

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