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यूपी: प्रदेश में बना चुनावी माहौल, इस रणनीति पर चुनाव लड़ते दिखेंगे सपा और भाजपा; निकाली गई PDA की काट?

Mon, 14 Sep 2026 06:18 AM IST
रोहित मिश्र सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला लखनऊ

सार

UP Assembly Elections: यूपी में विधानसभा चुनाव का मंच करीब-करीब सज गया है। मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होना तय दिख रहा है। 
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सीएम योगी आदित्यनाथ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच भाजपा ने समाजवादी पार्टी के खिलाफ चुनावी नैरेटिव को धार देने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पार्टी अब केवल अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के बजाय सपा सरकार के कार्यकाल से सीधी तुलना करने की तैयारी में है। कानून-व्यवस्था, माफिया और संगठित अपराध से लेकर बिजली, महिला सुरक्षा और गरीब कल्याण तक के मुद्दों पर ‘तब और अब’ का आंकड़ा जनता के सामने रखने की योजना है।

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सूत्रों के मुताबिक भाजपा के चुनावी रणनीति में खासतौर से निशाने पर सपा सरकार का 2012 से 2017 तक का कार्यकाल रहेगा। इस अवधि में दर्ज अपराध, दंगे, हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े आंकड़ों को 2017 के बाद की स्थिति से जोड़कर पेश करने की भी कोशिश होगी। भाजपा अपने चुनावी रणनीति में सपा को घेरने के लिए माफिया के खिलाफ कार्रवाई सबसे आक्रामक मुद्दों में शामिल तो करेगी ही, साथ ही गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, संपत्ति कुर्की और संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस अभियान की तुलना भी सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था से करते हुए आंकड़े जनता के बीच रखेगी।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा की रणनीति में मुलायम सिंह यादव के शुरुआती कार्यकाल से लेकर अखिलेश यादव सरकार तक के दौर को निशाने पर रखा जाएगा। सपा के शासनाकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर जनता के बीच कैसी धारणा थी और अपराध, लूट, डकैती, रंगदारी, गैंगवार तथा संगठित अपराध के कितने मामले सामने आए। इसके समानांतर 2017 के बाद की भाजपा सरकार में अपराध नियंत्रण और माफिया के खिलाफ हुई कार्रवाई के आंकड़े रखकर जनता को समझाना भाजपा के चुनावी रणनीति का प्रमुख हिस्सा होगा।

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यह है भाजपा की रणनीति

दरअसल भाजपा के नेता जिस तरह से सपा-कांग्रेस के खिलाफ उनके शासनकाल में घटित घटनाओं को अपने भाषण का हिस्सा बना रहे हैं, उससे भी साफ है कि 2027 के चुनावी रणनीति में भी भाजपा यह जनता के मन में यही बिठाने की कोशिश करेगी कि सपा के दौर की तुलना में भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था, विकास और गरीब कल्याण के मोर्चे पर क्या बेहतर किया? यानि ऐसे सवालों को तूल देकर भाजपा अपने शासन के ‘रिपोर्ट कार्ड’ पर केंद्रित करने को अपनी रणीनीति का हिस्सा बनाएगी।

‘सपा से बेहतर भाजपा क्यों?’भाजपा इस सवाल का जवाब नारे से नहीं, आंकड़ों से देने की कोशिश करेगी। साथ ही अपराध और कानून-व्यवस्था, बिजली, महिला सुरक्षा, माफिया पर कार्रवाई और गरीब कल्याण...इन पांच मोर्चों पर सरकार-दर-सरकार तुलनात्मक रिपोर्ट कार्ड सामने रखकर पार्टी 2027 की चुनावी बहस को ‘कौन बेहतर शासन देता है' के सवाल पर ले जाने की भी कोशिश करेगी। भाजपा की मौजूदा रणनीति के संकेत साफ हैं कि इस बार चुनावी मैदान में सिर्फ वोट नहीं, शासन के रिपोर्ट कार्ड की भी परीक्षा होगी।

महिला सुरक्षा पर भी होगी सीधी तुलना

महिला अपराध भाजपा के लिए संवेदनशील लेकिन महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा होगा। महिला हेल्पलाइन, मिशन शक्ति, पुलिस रिस्पांस सिस्टम और थानों में महिला संबंधी शिकायतों की व्यवस्था को सपा शासनकाल से तुलना के साथ पेश करने पर फोकस किया जा सकता है। भाजपा सिर्फ अपराध घटने का दावा नहीं बल्कि एफआईआर, अपराध दर, चार्जशीट और दोषसिद्धि के आंकड़ों के जरिए यह बताने की कोशिश करेगी कि व्यवस्था में वास्तविक बदलाव कितना आया है।
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पीडीए के मुकाबले भाजपा का सामाजिक विस्तार

सपा के पीडीए के मुकाबले भाजपा गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित, सवर्ण और विभिन्न छोटे सामाजिक समूहों को साथ बनाए रखने की रणनीति अपनाएगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं, जबकि सपा ने 37 सीटें जीतीं। यही कारण है कि 2027 के लिए भाजपा के लिए सामाजिक समीकरण पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। यानी संदेश देने की कोशिश होगी कि भाजपा सरकार का लाभ जाति देखकर नहीं, जरूरत के आधार पर मिला।
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