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सुना है क्या: 'पावर का खौफ', साथ ही 'उल्टी पड़ रही है डिमांड और आफिस में कम सोशल मीडिया पर ज्यादा' के किस्से

Sun, 01 Nov 2026 02:04 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'पावर का खौफ' की कहानी। इसके अलावा 'उल्टी पड़ रही है डिमांड' और 'आफिस में कम सोशल मीडिया पर ज्यादा' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

पावर का खौफ

इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं और बहुप्रतीक्षित लिस्ट आ ही गई। कुछ नामों पर ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में जो कयास लग रहे थे, लगभग फिट बैठे। लेकिन कुछ नामों ने चौंकाया। ऐसे ही एक सख्तमिजाज साहब का नाम अतिरिक्त प्रभार की लिस्ट में आने से कई दूसरे बेचैन हो गए। ऐसी ही एक टीम की टिप्पणी थी कि हम तो ट्रेनिंग से साहब के जाने की मन्नत मांग रहे थे, यहां तो उलट उन्हें कई चार्ज और मिल गए। ऐसा न हो कि उनकी कार्यशैली और विस्फोटक हो जाए।

उल्टी पड़ रही है डिमांड

प्रदेश में युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने वाले विभाग में एक साहब सब पर भारी पड़ रहे हैं। हालत यह है कि विभाग के सबसे बड़े स्टेक होल्डर ने उनके खिलाफ मोर्चा खोला तो साहब ने उल्टे उनके ही खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है। आए दिन नोटिस-नोटिस पर जारी की जा रही है। ऐसे में अब स्टेक होल्डर सकते में हैं कि उनकी मांग अब उन पर ही भारी पड़ रही है। साहब ने मांग तो अभी तक नहीं पूरी की और पूरे विभाग पर भारी पड़ रहे हैं।

आफिस में कम सोशल मीडिया पर ज्यादा

कई विभागों को सुधारने का दावा करने वाले अफसर इन दिनों अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं। क्योंकि उनके पास जो विभाग है, उसमें सुधार का कोई खास काम नहीं है। ऐसे में वे आफिस के बजाय कभी इस राज्य में तो कभी उस राज्य में प्रशिक्षण देते नजर आ रहे हैं। हर राज्य में जाने पर उसका जिक्र सोशल मीडिया में करना नहीं भूलते। उनका सपना है कि अंतिम समय प्रशिक्षण के बहाने कोई बड़ा अवार्ड हासिल किया जाए। अब देखना यह है कि उनकी मंसा पूरी होती है अथवा नहीं।
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