जब हवा में PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ जाती है, तो शारीरिक गतिविधि के दौरान तेज सांस लेने से शरीर में इन कणों का प्रवेश बढ़ सकता है। इससे खांसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, नियमित शारीरिक गतिविधि के फायदे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अधिक प्रदूषण के दौरान एक्सरसाइज का समय, स्थान और तीव्रता बदलना जरूरी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि प्रदूषण के दिनों में एक्सरसाइज कैसे करें और किन बातों का ध्यान रखें? आइए जानते हैं कुछ जरूरी सावधानियां, जिनकी मदद से आप अपनी फिटनेस को बनाए रखते हुए प्रदूषण के संपर्क को कम कर सकते हैं।
- एक्सरसाइज से पहले AQI जरूर चेक करें
घर से बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जरूर देखें। भारत में AQI की जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर मिल सकती है। यदि AQI खराब, बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में है, तो बाहर दौड़ने और कठिन एक्सरसाइज से बचें।
व्यस्त सड़कों, ट्रैफिक और निर्माण स्थलों के पास एक्सरसाइज करने से बचें। संभव हो तो कम प्रदूषण वाले स्थान पर जाएं। ध्यान रखें कि सुबह का समय हमेशा साफ हवा की गारंटी नहीं देता। इसलिए समय तय करने से पहले स्थानीय AQI की स्थिति देखें।
- जरूरत पड़ने पर घर के अंदर एक्सरसाइज करें
प्रदूषण बढ़ने पर घर के अंदर योग, हल्की स्ट्रेचिंग या अन्य उपयुक्त व्यायाम करना बेहतर विकल्प हो सकता है। यदि संभव हो तो साफ हवा वाले कमरे में एक्सरसाइज करें। घर के अंदर भी धुआं, अगरबत्ती और खाना पकाने से होने वाले प्रदूषण से बचें।
खराब एयर क्वालिटी में दौड़ना, तेज साइकिल चलाना और हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट करने से प्रदूषित हवा ज्यादा मात्रा में सांस के जरिए अंदर जा सकती है। ऐसे दिनों में एक्सरसाइज की अवधि और तीव्रता कम करें। AQI गंभीर होने पर बाहरी एक्सरसाइज टालें।
- मास्क को लेकर बरतें सावधानी
प्रदूषण के संपर्क को कम करने के लिए सही फिटिंग वाला N95 या N99 रेस्पिरेटर उपयोगी हो सकता है। हालांकि, मास्क पहनना खराब हवा में कठिन एक्सरसाइज करने का विकल्प नहीं है। सांस लेने में परेशानी होने पर गतिविधि रोकें और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लें।
- इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
एक्सरसाइज के दौरान खांसी, सीने में जकड़न, आंखों में जलन, चक्कर या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत रुक जाएं और प्रदूषण से दूर साफ वातावरण में जाएं। लक्षण गंभीर हों या बने रहें, तो चिकित्सा सहायता लें।
- बच्चों और बुजुर्गों को रखें विशेष ध्यान
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों को खराब हवा में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। इन्हें प्रदूषण के दौरान बाहर कठिन शारीरिक गतिविधियों से बचना चाहिए और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।