विज्ञापन

Social Media Poetry: क्या बताऊँ तुम्हें रात कैसे कटी

काव्य डेस्क

Viral Kavya
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            क्या बताऊँ तुम्हें रात कैसे कटी   
        
                                                    
                            
रात भर सिर्फ तुमको गाते रहे   

कोई था भी नहीं मुझे सुननेवाला   
चांद तारों को नगमे सुनाते रहे   

गाते गाते फिर सवेरा हुआ   
मेरी धरती का आंचल गीला हुआ   

रात भर नीले अम्बर में रोया कोई   
ओस की-बूंद ये कहानी सुनाते रहे   

क्या बताऊं तुम्हें रात कैसे कटी   
फिर पुरवा पवन धीरे से बह गई   

फूल कलियों से ये दास्तां कह गई   
दिल की किताब पर जिसको अश्कों से लिख

गीत गजलों के अश्रु लौटाते रहे    
क्या बताऊं तुम्हें रात कैसे कटी   

रात भर सिर्फ तुमको गाते रहे

- राकेश धर द्विवेदी

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।


लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o 


 
19 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all