अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की जांच से एक अहम खुलासा हुआ है कि हमले के वक्त टाइगर के तुरंत एकाएक नीचे झुक जाने की वजह से ही उनकी जान बाल-बाल बच पाई। रविवार शाम जुहू के पुष्पा नरसी पार्क में फैंस को हाथ हिलाकर अलविदा कहने के बाद जैसे ही टाइगर अपनी बीएमडब्ल्यू कार की आगे की सीट पर बैठे, दो बदमाश वहां आ धमके।
एक हमलावर कार के ठीक सामने आ गया और दूसरा बाईं तरफ से पहुंच गया। दोनों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। फायरिंग होते ही टाइगर समझदारी दिखाते हुए अपनी सीट पर नीचे झुक गए। पुलिस का मानना है कि उनकी इसी त्वरित फुर्ती की वजह से बड़ा हादसा टल गया, क्योंकि अगर उन्हें एक पल की भी देर होती, तो गोली सीधे उन्हें लग सकती थी।
कार के अंदर अब भी एक गोली फंसी
इस हमले में टाइगर को विंडशील्ड के टूटे कांच से हल्की-फुल्की खरोंचें आईं, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस इब्राहिम बलूच और वहां मौजूद एक राहगीर उमेश चौहान छर्रे लगने से घायल हो गए। जांच में पता चला है कि इस वारदात की पूरी तैयारी पहले से की गई थी। दोनों शूटरों के अलावा एक बाइक सवार भी पास में ही तैयार खड़ा था, ताकि हमला करने के बाद वे तुरंत फरार हो सकें।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने मौके से गोली के 10 टुकड़े बरामद किए हैं। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि ये गोलियां कार से टकराकर टूटी थीं या फायरिंग के दौरान कोई गोली मिसफायर हुई थी। पुलिस का कहना है कि इस हमले में देसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था और कार के अंदर अब भी एक गोली फंसी हुई है।
बैलिस्टिक एक्सपर्ट की मदद ले रही पुलिस
पुलिस के मुताबिक, आरोपी फूलसिंह कार के ठीक सामने खड़ा था और उसने चार राउंड गोलियां चलाईं। इनमें से एक गोली कार की विंडशील्ड को चीरते हुए अंदर घुस गई और पिछली सीट में जा धंसी, जिससे शीशा चकनाचूर हो गया। अब जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल है कि ड्राइवर फिरदौस को इसी गोली का टुकड़ा लगा था या वह किसी और गोली के छर्रों से घायल हुआ। इसकी पुष्टि के लिए मेडिकल रिपोर्ट और बैलिस्टिक एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। पुलिस को यह भी संदेह है कि एक और गोली कार के बोनट पर लगी थी। संभव है कि इसी का कोई टुकड़ा वहां खड़े उमेश चौहान को लगा हो, हालांकि पुलिस अभी इसकी पूरी पुष्टि नहीं कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कैप पहने हुए दूसरे शूटर रेहान ने कार के पास पहुंचकर पहली गोली चलाई, जो टाइगर की सीट के ठीक बगल वाले दरवाजे पर लगी। इसके बाद रेहान ने दोबारा निशाना साधकर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पिस्टल अचानक जाम हो गई। पुलिस इस बात को बहुत अहम मान रही है, क्योंकि अगर उस वक्त पिस्तौल जाम नहीं होती, तो शूटर एक और गोली चला सकता था। क्राइम ब्रांच ने मौके से मिले गोली के सभी टुकड़ों को फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि वारदात में कुल कितनी गोलियां चलाई गईं।
पहले भी की थी हमले की कोशिश
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों- 18 साल के फूलसिंह नरेश, 18 साल के रेहान अंसारी और 20 साल के ऋतिक कुमार उर्फ रोशन महतो को राजस्थान के कोटा से अरेस्ट किया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इन बदमाशों को हथियार किसने दिए थे और हमले की योजना किसने रची थी?
इस बीच जांच में यह भी पता चला है कि टाइगर श्रॉफ पर रविवार को जुहू के एक फुटबॉल ग्राउंड के बाहर गोलीबारी करने वाले तीनों आरोपी एक हफ्ते पहले 11 अक्टूबर को भी मौके पर मौजूद थे और कुछ देर तक वहीं आसपास घूमते भी रहे थे। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह बात सामने आई है। पुलिस को शक है कि वे तब भी अभिनेता पर हमला करने आए थे, लेकिन उस दिन टाइगर श्रॉफ के खेलने न आने के कारण वे लौट गए थे।
कैसे पकड़े गए टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के आरोपी?
एक कैब ड्राइवर को किया गया सिर्फ एक फोन कॉल मुंबई पुलिस को उन तीन आरोपियों तक ले गया, जिन्होंने रविवार को अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की थी। पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे और अपने फोन ज्यादातर समय बंद रखते थे। लेकिन एक छोटी सी गलती ने उन्हें पुलिस के गिरफ्त में ला दिया।
मुंबई पुलिस के अनुसार, रविवार रात को एक आरोपी ने बोरीवली रेलवे स्टेशन के बाहर एक एप के जरिए सूरत जाने के लिए कैब बुक करने के वास्ते अपना फोन चालू किया था। जब कैब तय समय पर नहीं पहुंची, तो आरोपी ने ड्राइवर को फोन किया और उसे उस जगह की जानकारी दी जहां वे लोग खड़े होकर उसका इंतजार कर रहे थे। इसके बाद तीनों आरोपी कैब में बैठकर सूरत के लिए रवाना हो गए।
आरोपियों की लोकेशन कैसे मिली?
मुंबई पुलिस के अनुसार, हमने टेक्निकल इन्वेस्टीगेशन और टेक्निकल इनपुट के आधार पर आरोपियों के फोन को ट्रैक करना शुरू किया था। साथ ही, रास्ते के सीसीटीवी कैमरों की मदद से उनकी पहचान भी पुख्ता कर ली गई थी। लेकिन आरोपी बार-बार अपने फोन बंद कर लेते थे ताकि पुलिस उन तक न पहुंच सके। जब उन्होंने टैक्सी वाले को फोन किया, तो उसके तुरंत बाद उन्होंने फोन फिर से स्विच ऑफ कर लिया था। हालांकि, उस एक कॉल की वजह से पुलिस को टैक्सी ड्राइवर का मोबाइल नंबर मिल गया।
पुलिस ने तुरंत उस कैब ड्राइवर से संपर्क किया। वह ड्राइवर सूरत का रहने वाला है और अक्सर उस रूट पर अपनी गाड़ी चलाता है। जब तक पुलिस ने ड्राइवर से बात की, तब तक वह उन तीनों आदमियों को सूरत में छोड़ चुका था। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि उसने उन्हें सूरत बस स्टैंड के पास छोड़ा था। इसके बाद पुलिस ने वहां के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें तीनों आरोपी आसपास ही खड़े नजर आए।
आरोपियों ने बस स्टैंड पर कुछ देर तक बस का इंतजार किया, लेकिन जब उन्हें कोई बस नहीं मिली, तो उन्होंने सूरत से ही पुणे और जयपुर जाने वाली ट्रेन पकड़ने का इरादा कर लिया। पुलिस को रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से भी सीसीटीवी फुटेज हाथ लग गया, जिससे यह साफ हो गया कि वे तीनों ट्रेन के किस डिब्बे में चढ़े थे।
कोटा से कुछ यूं हुई गिरफ्तारी
मुंबई पुलिस के अनुसार, ट्रेन का अगला बड़ा स्टॉप कोटा था और हमारी अपनी पुलिस टीम वहां से कई घंटे की दूरी पर थी। समय गंवाए बिना हमने तुरंत कोटा पुलिस से संपर्क किया और उन्हें उस खास कोच की पूरी जानकारी दे दी।
सोमवार की सुबह करीब 9.45 पर कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के पास उनके पुराने बैचमेट और इस समय मुंबई क्राइम ब्रांच में डीसीपी राज रौशन का फोन आया। इसके बाद बिना किसी देरी के कोटा पुलिस द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई।
एसपी तेजस्वनी गौतम ने मीडिया को बताया कि मुंबई पुलिस से फोन आते ही कोटा रेलवे स्टेशन के अंदर, बाहर, आने-जाने के रास्तों, यार्ड और सभी प्लेटफॉर्मों पर कुल मिलाकर दो दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया।
गौतम ने बताया कि पूरी ट्रेन की सघन तलाशी ली गई और आरोपियों की पहचान की गई। जैसे ही जनरल कोच में उनकी पहचान कन्फर्म हुई, पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया ताकि वे किसी भी हाल में भाग न सकें।