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सुप्रीम कोर्ट: सीजेआई की बेंच का निर्देश- नकली दवा पर रोक से जुड़ी याचिका अधिकारियों के पास भेजें याचिकाकर्ता

Tue, 29 Sep 2026 09:44 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपनी रजिस्ट्री को नकली व मिलावटी दवाओं के निर्माण तथा बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक व्यापक ढांचा बनाने की मांग वाली याचिका की प्रति संबंधित अधिकारियों को विचार के लिए भेजने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय से सवाल किया, क्या आपने यह याचिका दायर करने से पहले अधिकारियों को कोई सुझाव दिया था? उपाध्याय ने मौजूदा व्यवस्था में खालीपन का जिक्र करते हुए कहा कि बंगलूरू के कई अस्पतालों में नकली कैंसर रोधी दवाओं की आपूर्ति किए जाने की खबरें सामने आई हैं। पीठ ने कहा, हम आपकी याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर संबंधित अधिकारियों को भेज देंगे। यहां याचिका लंबित रखने के बजाय यह अधिक प्रभावी होगा। पीठ ने कहा, ऐसे मामलों में जहां प्रतिवादियों को विभिन्न प्रकार की कार्रवाई करनी है, हम मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना इस याचिका का निपटारा कर रहे हैं। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिका की एक प्रति संबंधित अधिकारियों को विचार के लिए भेजे।
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27वें जन्मदिन से चार दिन पहले हुई मौत, सुप्रीम कोर्ट ने लॉ क्लर्क की याद में समर्पित किया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक दुर्लभ पहल करते हुए अपने दिवंगत लॉ क्लर्क-कम-रिसर्च एसोसिएट रित्विक देसवाल की याद में एक फैसला समर्पित किया। देसवाल की 27वें जन्मदिन से सिर्फ चार दिन पहले मौत हो गई थी। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) से जुड़े एक मामले में शोध और तैयारी में मदद की थी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने देसवाल के निधन पर दुख जताया। पीठ ने कहा कि इंसानी जीवन बेहद नाजुक है और उसकी क्षणभंगुरता का एहसास अक्सर बहुत देर से होता है। अदालत ने उनके शोध कार्य, ईमानदारी और कानून के प्रति समर्पण की सराहना की।

इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने आरोपी की ओर से दिया गया कबूलनामा उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने कहा कि निवारक हिरासत एक असाधारण कदम है और इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी से, केवल उचित परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं सीमा चिश्ती और कुनाल कामरा
स्टैंड-अप कॉमेडियन कुनाल कामरा और पत्रकार सीमा चिश्ती ने विधायकों के विशेषाधिकार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दोनों ने इस मामले में अपनी बात रखने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ 6 अक्तूबर से सुनवाई करेगी।

कामरा ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा में उनके खिलाफ चल रही विशेषाधिकार कार्यवाही का इस मामले से सीधा संबंध है। उनके कॉमेडी शो ‘नया भारत’ में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर किए गए मजाक को लेकर भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था।

वहीं, ‘द वायर’ की संपादक सीमा चिश्ती ने प्रेस की आजादी, नागरिकों के जानने के अधिकार और विधायी विशेषाधिकार के बीच संतुलन का सवाल उठाया है। मामला 2003 से लंबित है और इसमें मौलिक अधिकारों तथा विधायी विशेषाधिकारों के बीच संबंध पर फैसला होना है।
 
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कल्पना सोरेन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट मामले में आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन के खिलाफ कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट करने के मामले में आरोपी 30 वर्षीय सुरक्षा गार्ड सहदेव उरांव उर्फ सहदेव ओरांव को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने आरोपी के एक साल से अधिक समय से हिरासत में रहने और उसके खिलाफ लगाए गए अपराधों में अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान होने को जमानत का आधार माना।  

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की मौजूदा स्थिति में आरोपी की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। यह भी दलील दी गई कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर आधारित है और संबंधित डिजिटल साक्ष्य पहले ही पुलिस के कब्जे में हैं।

सहदेव उरांव को इस मामले में 6 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में था। कथित फेसबुक पोस्ट एक ‘आदिवासी लड़का राजू उरांव’ नाम के अकाउंट से किए जाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को इस अकाउंट से कल्पना सोरेन की तस्वीर के साथ कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की गई थी। इसके अगले दिन रांची साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी सीधे कल्पना सोरेन की शिकायत पर दर्ज नहीं हुई थी।

इस मामले में सहदेव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी की ओर से मामले में डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण बताया गया है। आरोपी ने पहले झारखंड हाई कोर्ट में भी जमानत की मांग की थी, लेकिन 17 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से यह भी बताया गया कि इसी कथित घटना से संबंधित एक अन्य मामले में उसे फरवरी 2026 में जमानत मिल चुकी है। यह मामला कांके प्रखंड समन्वय समिति के प्रमुख जावेद अंसारी की शिकायत से जुड़ा बताया गया है। दोनों मामलों में प्राथमिकी सीधे कल्पना सोरेन की ओर से दर्ज नहीं कराई गई थी।

इससे पहले अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट की इसी पीठ ने सहदेव की याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया था। अब अदालत ने लंबी हिरासत, जांच पूरी होने और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं होने के आधार पर उसे जमानत दी है।
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