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नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान जेल से रिहा, बोले- आज से ही शुरू करूंगा प्रचार

Wed, 30 Sep 2026 04:24 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, कोलकाता।

सार

मिलन प्रधान को इस महीने की शुरुआत में वर्ष 2007 में दर्ज हत्या के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी। हालांकि, जरूरी कागजी कार्रवाई और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें बुधवार दोपहर सुधार गृह से रिहा किया गया।
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मिलन प्रधान - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान बुधवार को जेल से रिहा हो गए। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2007 में दर्ज छह आपराधिक मामलों में उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। हल्दिया जेल के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। 

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जेल से बाहर आने के बाद प्रधान ने कहा कि वह नंदीग्राम उपचुनाव के लिए आज से ही प्रचार शुरू करेंगे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं आज से ही प्रचार शुरू करूंगा। अब ज्यादा समय नहीं बचा है। नंदीग्राम की जनता बाहर से आए किसी व्यक्ति के बजाय मिट्टी के बेटे को जीतते देखना चाहती है। मुझे जीत का भरोसा है। नंदीग्राम उपचुनाव के लिए प्रचार चार अक्तूबर को समाप्त होगा, जबकि मतगणना नौ अक्तूबर को होगी।

हाईकोर्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी को 20 अक्तूबर तक राहत दी है। इससे उन्हें नंदीग्राम विधानसभा सीट के उपचुनाव में प्रचार करने की अनुमति मिली है। नंदीग्राम विधानसभा सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भवानीपुर सीट को बरकरार रखने का फैसला करने के बाद खाली हुई थी। उन्होंने इस साल हुए राज्य विधानसभा चुनाव में दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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यह सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई थी। उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर सीट दोनों पर जीत हासिल की थी और भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया था।

'पुलिस ने नंदीग्राम से नामांकन वापस लेने का बनाया दबाव', कांग्रेस उम्मीदवार का आरोप

 पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने बुधवार को राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उन पर अपना नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया। 

बुधवार को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया स्थित सुधार गृह से बाहर आने के बाद मिलन प्रधान ने मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस ने उन पर चुनाव से अपना नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया था।

मिलन ने कहा, 18 सितंबर को जब मैं प्रचार कर रहा था, तब सादे कपड़ों में कुछ पुलिस अधिकारी मुझे चांदीपुर से उठाकर ले गए थे। मिलन प्रधान के मुताबिक, पुलिस ने उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी और कार से उन्हें मंदारमणि के एक होटल में ले गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां उनसे अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया। साथ ही दावा किया कि नामांकन वापस लेने के बदले उन्हें उनकी इच्छा के मुताबिक कुछ भी देने की पेशकश की गई थी।

उन्होंने कहा कि उस समय पुलिस ने उन्हें आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार नहीं किया था। मिलन ने कहा, जब मैंने अपना नामांकन वापस लेने से इनकार कर दिया तो मुझे वापस चांदीपुर ले जाया गया और वहां आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।हालांकि, खबर लिखे जाने तक पूर्वी मेदिनीपुर जिला पुलिस की ओर से मिलन प्रधान के इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

उन्हें जमानत दिए जाने के कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के कदम पर भी मिलन प्रधान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को शीर्ष अदालत में सफलता नहीं मिलेगी।
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