गुरुवार को कांग्रेस ने ईसीआईनेट (ECINET) एप में कथित कमियों को लेकर भाजपा पर हमला बोला। पार्टी ने कहा कि यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि इसे नई दिल्ली में मौजूद सत्ताधारी पार्टी के हेडक्वार्टर से ही नाम हटाने और जोड़ने की सभी प्रक्रियाओं को सेंट्रलाइज (एक जगह से नियंत्रित) करने के लिए बनाया गया था।
रमेश ने क्या आरोप?
क्या है पूरा मामला?
रमेश की ये टिप्पणियां उस विवाद के बीच आई हैं जो 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई, जो ज्यादातर 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया से जुड़े थे।
अपने दो आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय और विचार-विमर्श होना सामान्य बात है। साथ ही, आयोग ने जोर देकर कहा कि उसके सभी आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही जारी किए जाते हैं।