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सेबी अध्यक्ष: तुहिन कांत पांडे ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के विनियमन में सुधार की सलाह दी, क्या बदल सकता है?

Wed, 30 Sep 2026 02:34 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

सेबी अध्यक्ष तुहिन पांडे ने मुंबई में पोर्टफोलियो प्रबंधकों के विनियमन को उद्योग के विकास के साथ बदलने की सलाह दी। उन्होंने नवाचार को बढ़ावा देने, अनुपालन आसान बनाने और निवेशकों के लिए नए विकल्प खोलने पर जोर दिया। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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तुहिन कांत पांडे, सेबी चेयरमैन - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय प्रतिभूति व विनियम बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए विनियमन को उद्योग के विकास के साथ बदलने का सुझाव दिया है। उन्होंने मुंबई में एपीएमआई (एसोसिएशन पोर्टफोलियो मैनेजर्स इंडिया) के वार्षिक सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए यह बात कही। पांडे ने कहा कि बाजार नियामक को निवेशक संरक्षण से समझौता किए बिना नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही अनावश्यक अनुपालन जैसी बाधाओं को कम करने पर भी जोर देना चाहिए।

सेबी अध्यक्ष ने बताया कि पीएमएस विनियमन को केवल सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे नवाचार को सक्षम बनाना और अनुपालन को आसान बनाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए, सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के नियमों की व्यापक समीक्षा का मार्गदर्शन किया है। सेबी ने पिछले सप्ताह ही इस समीक्षा को मंजूरी दी थी। यह प्रक्रिया केवल सीमित संशोधनों तक ही सीमित नहीं है। इसमें निवेशकों के हितों के लिए प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के बाद नियामक ढांचे का नए सिरे से मूल्यांकन भी शामिल है। संशोधित ढांचे का मुख्य उद्देश्य पीएमएस उद्योग का विकास करना है। इसका लक्ष्य अनुपालन में आसानी लाना, नियामक ढांचे का समेकन और सरलीकरण करना भी है। अनावश्यक प्रावधानों को हटाना भी इस संशोधन का हिस्सा है।

क्या संशोधित ढांचे से निवेशकों को अधिक विकल्प मिलेंगे?

पांडे ने कहा कि इस ढांचे से पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ेंगे। निवेशकों की जरूरतें अब अधिक और अलग होती जा रही हैं। आज निवेशक के पास अच्छे प्रतिफल प्राप्त करने के कई विकल्प मौजूद हैं। निवेशक अपनी पसंद के अनुसार कहीं भी निवेश कर सकता है। नई योजनाओं के तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक म्यूचुअल फंड की प्रत्यक्ष योजनाओं का उपयोग कर सकते हैं। इसमें ईटीएफ, इंडेक्स फंड और विशेष फंड शामिल हैं, जिनकी न्यूनतम निवेश राशि 25 लाख रुपये होगी।

स्वतंत्र फंड मैनेजर क्या भूमिका निभाएंगे?

सेबी स्वतंत्र फंड मैनेजर्स (एफएम) की भी शुरुआत कर रहा है। इससे निवेश पेशेवरों और उद्यमी प्रतिभाओं को स्थापित पोर्टफोलियो प्रबंधक के साथ काम करने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक स्वतंत्र फंड मैनेजर की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार बने रहेंगे। पांडे ने कहा कि प्रौद्योगिकी निवेश से जुड़े फैसले लेने की क्षमता बढ़ा सकती है। लेकिन इसकी जवाबदेही को आउटसोर्स नहीं किया जा सकता है। इसलिए पोर्टफोलियो के लिए जवाबदेही अंत में मानवीय तरह से देनी होगी।

पीएमएस उद्योग का विकास कितना तेजी से हुआ है?

पीएमएस उद्योग का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। वित्त वर्ष 2016 के अंत में यह लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये था। अगस्त 2026 तक प्रबंधन के तहत संपत्ति लगभग 9.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। पंजीकृत पोर्टफोलियो की संख्या भी एक दशक पहले 200 थी, जो बढ़कर 530 से अधिक हो गई है। सेबी अध्यक्ष ने कहा कि वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के साथ नियामक समन्वय महत्वपूर्ण होगा।

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