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पितृपक्ष मेला: गयाजी में महासंगम का समापन, 51 लाख श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान; जानिए इस बार क्या-क्या खास हुआ?

Sat, 10 Oct 2026 08:19 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

गयाजी में पितृपक्ष महासंगम ने श्रद्धालुओं की संख्या के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया। इस बार 51 लाख से अधिक लोगों ने फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण किया। रूस, जर्मनी समेत पांच देशों के नागरिक भी अपने पूर्वजों के निमित्त अनुष्ठान करने पहुंचे। जानिए, कैसे आधुनिक सुविधाओं और श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ ने गयाजी के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दी।
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पितृ पक्ष मेला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ गया में आयोजित पितृपक्ष महासंगम-2026 का 10 अक्टूबर को समापन हो गया। इस वर्ष 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गयाजी पहुंचकर फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण किया। देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी लोग अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचे। श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भागीदारी ने गयाजी की धार्मिक महत्ता के साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका को भी रेखांकित किया। पितृपक्ष के दौरान फल्गु नदी के घाटों पर पिंडदान, विष्णुपद मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गयाजी में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए आवास, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया।

 

चार साल में बदली श्रद्धालुओं की तस्वीर, 2026 में 51 लाख पार

गयाजी में पितृपक्ष के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 9.15 लाख, 2023 में 26.84 लाख, 2024 में 40.55 लाख और 2025 में 31.87 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं, वर्ष 2026 में यह संख्या 51 लाख से अधिक हो गई। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या गयाजी की धार्मिक पहचान के साथ उसकी पर्यटन क्षमता को भी दर्शाती है। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर आवास, परिवहन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा जैसी सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ रही है।

 

रूस-जर्मनी समेत पांच देशों के 22 नागरिकों ने किया पिंडदान

गयाजी की आस्था अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों को आकर्षित कर रही है। इस वर्ष दो अक्टूबर को रूस, जर्मनी, यूक्रेन, इटली और लातविया के 22 विदेशी श्रद्धालुओं के एक समूह ने फल्गु नदी के देवघाट पर पिंडदान और तर्पण किया।

इस समूह में जर्मनी के 11, रूस के छह, यूक्रेन के दो तथा इटली और लातविया के एक-एक नागरिक शामिल थे। खास बात यह रही कि रूस और यूक्रेन जैसे संघर्षरत देशों के नागरिकों ने एक साथ अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए। यह दृश्य पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना के जरिये लोगों के जुड़ाव का प्रतीक बना। फ्रांस और ब्राजील सहित अन्य देशों के श्रद्धालुओं के भी गयाजी पहुंचने का उल्लेख किया गया है। इससे बिहार में आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को बल मिलता है।

 

2500 बिस्तरों की टेंट सिटी, एआई अनुवाद से विदेशी श्रद्धालुओं को सुविधा

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच पितृपक्ष महासंगम-2026 में आधुनिक सुविधाओं पर भी जोर दिया गया। इस दौरान 2500 बिस्तरों की क्षमता वाली टेंट सिटी बनाई गई। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड आधारित रिस्ट बैंड की व्यवस्था की गई। इसके अलावा, विदेशी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एआई आधारित भाषा अनुवाद और ई-पिंडदान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य तीर्थयात्रियों के लिए धार्मिक अनुष्ठानों को सुविधाजनक बनाना और मेले के प्रबंधन को बेहतर करना रहा।

 

श्रद्धालुओं की भीड़ से स्थानीय कारोबार को मिला सहारा

पितृपक्ष महासंगम का असर धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहता। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, धर्मशाला, परिवहन, खानपान और पूजा सामग्री से जुड़े कारोबार को भी अवसर मिलता है। पंडा परिवारों के अलावा फूल-माला विक्रेता, दुकानदार, ऑटो और ई-रिक्शा चालक तथा छोटे व्यापारियों की आजीविका भी इस आयोजन से जुड़ी है। इस वर्ष गांधी मैदान की टेंट सिटी में जीविका दीदियों की ओर से संचालित रसोई के माध्यम से श्रद्धालुओं को किफायती और सात्विक भोजन उपलब्ध कराया गया। इससे स्थानीय महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिला।

 

विष्णुपद से महाबोधि मंदिर तक धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं

गयाजी की विशेषता यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत भी है। विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी हिंदू धर्मावलंबियों के लिए पितृ कर्म के प्रमुख केंद्र हैं, जबकि पास स्थित बोधगया अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर को वर्ष 2002 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। पितृपक्ष महासंगम-2026 में 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी, विदेशी नागरिकों की मौजूदगी और आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था ने गयाजी को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में फिर रेखांकित किया। अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और बेहतर प्रबंधन इस तीर्थस्थल की आगे की यात्रा के लिए अहम होगा।

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